कथा का श्रवण मनोमंथन के लिए आवश्यक :दिनेशाचार्य
अयोध्या, अमृत विचार। रामपुरभगन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास महंत दिनेशाचार्य ने कहा कि भागवत कथा के माध्यम से हम भगवान से जुड़ते हैं, कथा मनोरंजन नहीं बल्कि मनोमंथन के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रभु की कथा श्रवण कर यदि आपका ह्रदय द्रवित नहीं हुआ, नेत्र सजल नहीं हुए, प्रभु के प्रति आपका प्रेम दृढ़ नहीं हुआ तो समझिए आपने कथा सुनी ही नहीं।
उन्होंने कहा कि निर्धन होना अपराध नहीं किंतु निर्धनता में ईश्वर को भूलना अपराध है, सुदामा जी निर्धन थे केवल इसलिए भगवान ने उनकी सेवा नहीं की बल्कि निर्धन होते हुए भी हृदय में भगवान के प्रति भक्ति, प्रेम था जिसके चलते भगवान कृष्ण ने सुदामा का सम्मान किया। भगवान किसी के धन वैभव और पद को नहीं देखते भगवान तो भक्तों का हृदय ही देखते हैं जिसका हृदय निर्मल होता है वह भगवान की कृपा प्राप्त करता है। कथाव्यास ने बताया की भागवत की कथा से परीक्षित महाराज का मोक्ष देखकर ब्रह्मा ने निर्णय किया कि श्रीमद्भागवत मुक्तिशास्त्र है। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों भक्तों ने कथा श्रवण किया।
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