कड़ा संदेश
भारत को साइबर सुरक्षा का सबसे ज्यादा खतरा चीन से है, भारत में 35 प्रतिशत साइबर हमले अकेले चीन से किए गए हैं। केंद्र सरकार ने देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिहाज से चीन के 232 नुकसानदेह ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें 138 ऐप सट्टे और 94 ऐप लोन से संबंधित हैंं।
सरकार का कहना है कि इन एप्स का जासूसी और प्रोपेगेंडा के औजार के रूप में भी दुरुपयोग किया जा सकता है। इससे भारतीय नागरिकों के डेटा लीक होने का भी खतरा था। प्रतिबंध की कार्रवाई गृह मंत्रालय की अनुशंसा पर इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने की है।
चीनी मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध अपेक्षाकृत छोटा लक्ष्य है क्योंकि भारत कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में चीन के उत्पादों पर निर्भर है। फिर भी ये प्रतिबंध चीन के सबसे महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों में से एक 21वीं सदी की डिजिटल महाशक्ति बनना, को प्रभावित कर सकता है।
इससे पहले सरकार ने 2022 में चीन से संबंधित 54 मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित किया था। जून 2020 भी में सरकार ने टिकटॉक और यूसी ब्राउजर जैसे 59 चीनी ऐप पर पाबंदी लगा दी थी। जून 2020 में भारत सरकार ने चीनी ऐप पर प्रतिबंध का कदम लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच पैदा हुए तनाव के बाद उठाया था।
उसके बाद इन प्रतिबंधित ऐप के नकली संस्करण के रूप में उतारे गए ऐप को भी अगस्त 2020 में प्रतिबंधित कर दिया था। उसी साल सितंबर में भी सरकार ने 118 अन्य चीनी ऐप पर भी पाबंदी लगा दी जिनमें लोकप्रिय गेमिंग ऐप पबजी भी शामिल था।
जब सरकार ने 59 चीनी ऐप पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाया था, उस समय चीन ने भारत के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे डब्ल्यूटीओ के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया था। भारत की ओर से कहा गया था कि कई चीनी ऐप का प्रयोग कानून व्यवस्था को बिगाड़ने, उद्योगों को प्रभावित करने के संदर्भ में किया जा रहा था।
ऐसे में आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ बाह्य सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा चीनी ऐप पर लगाए गए प्रतिबंध डब्ल्यूटीओ के नियमों का उल्लंघन नहीं करते हैं। सरकार का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित उसकी चिंताओं को रेखांकित करता है।
प्रतिबंध लगाने का निर्णय न केवल एक भू-राजनीतिक कदम है, बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव भी हो सकता है। कुल मिलाकर चीन को संदेश दिया गया है कि भारत की दीर्घ कालीन नीति में बड़ा और स्थायी बदलाव आ गया है। सरकार ने संकेत दे दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वह कड़ी कार्रवाई करने से हिचकेगी नहीं।
