बच्चों में सृजनात्मक कौशल कला विकसित करें शिक्षक: उदयराज
बहराइच, अमृत विचार। जूनियर हाईस्कूल कक्षाओं में पढ़ रहे किशोरवय बच्चों को विषयगत ज्ञान के अलावा शिक्षक उनके अंदर छिपी सृजनात्मक कौशल कला की पहचान कर, उसे निखारने का काम करें। साथ ही उन्हें जीवन की चुनौती के लिए भी तैयार करें। प्रतिस्पर्धी दौर मे बच्चे प्रायः तनाव का प्रबन्धन नही कर पाते जिससे अवसादग्रस्त होने लगते इसके समाधान के लिए उनकी नियमित अंतराल पर काउंसिलिंग हो।
यह बाते शनिवार को डायट प्राचार्य उदयराज ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभागार में मौजूद प्रतिभागियों से कही।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में जनपद स्तरीय पांच दिवसीय जीवन कौशल प्रशिक्षण में शिक्षकों को स्कूली बच्चों के तनावपूर्ण जीवन को सहज बनाने एवं विभिन्न परिस्थितियों में समायोजन के लिए उन्हें कैसे तैयार करें इसकी जानकारी दी गयी।

प्रशिक्षण प्रभारी गोविंद किशोर ने बताया कि शिक्षकों को स्वयं अपने एवं बच्चों के अंदर जीवन कौशल का विकास करना चाहिए जिससे कि वह चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में भी सहजता से सामना कर सकें। सात से ग्यारह फरवरी तक चले प्रशिक्षण में विकास खंड चित्तौरा एवं पयागपुर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण में संदर्भदाता डायट प्रवक्ता अश्विनी सिंह , निहाल सिंह एवं अवधेश द्विवेदी द्वारा प्रतिभागियों को मॉड्यूल आधारित विभिन्न गतिविधियो जैसे रोल प्ले, सिचुएशन कार्ड, कहानी आदि के माध्यम से यूनिसेफ द्वारा बताए गए दस कौशलों जिनमे भावनाओं की समझ, अन्तर वैयक्तिक संबंध, तनाव प्रबंधन, समस्या समाधान एवं निर्णय लेना आदि कौशलों में दक्ष किया गया।
प्रशिक्षण पश्चात ये शिक्षक अपने विद्यालयों में अध्ययनरत किशोर, किशोरियों को तनाव का प्रबंधन करना व जीवन की समस्याओं से लड़ने के गुर सिखाएंगे। शिक्षकों ने फीड बैक सत्र के दौरान इस प्रशिक्षण को व्यावहारिक, शैक्षणिक एवं जीवनोपयोगी बताया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को प्रमाण पत्र दिया गया। इस दौरान काफी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
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