नए राज्यपाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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केंद्र सरकार ने 12 राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है। इनमें सात राज्यों में तबादले किए गए हैं। यानी वहां भेजे गए राज्यपाल पहले किसी अन्य राज्य में इसी पद पर थे। जो छह नए राज्यपाल बनाए गए हैं, उनमें एक उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश भी हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व न्यायाधीश पिछले महीने ही सेवानिवृत्त हुए हैं।
 
39 दिन पहले सेवानिवृत्त हुए जस्टिस अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। उनकी नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। हालांकि शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को राज्यपाल बनाए जाने का यह पहला अवसर नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि कहा जा सके कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश राज्यपाल पद के साथ न्याय करने में सक्षम नहीं हैं। फिर भी यह बात कही जाती रही है कि राज्यपाल पद और सुप्रीम कोर्ट के जज दोनों की गरिमा के लिए बेहतर होगा कि किसी जज को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल या अन्य पद सौंपते हुए न्यूनतम छह महीने या साल भर का अंतराल रखा जाए।
 
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने का अंतिम उदाहरण 2014 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की केरल के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति का है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस फातिमा बीवी 1992 में सेवानिवृत्ति के बाद 1997-2001 के दौरान तमिलनाडु की राज्यपाल थीं। विशेषज्ञों के मुताबिक राज्यपाल का पद केंद्र और राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में है जो देश के संघीय ढांचे को सुव्यवस्थित रूप से चलाने में मदद करता है। यानि लोकतंत्र के सुचारु संचालन में राज्यपाल की महत्वपूर्ण भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। 
 
आमतौर पर देखा गया है कि राज्य में चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को आमंत्रित करने के लिए राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों का अक्सर किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में दुरुपयोग किया गया है। ऐसे में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां बहस के केंद्र में रही हैं। बहरहाल, चुनाव से पहले राज्यपालों के ये फेरबदल सामान्य प्रक्रिया नहीं कहे जा सकते। 13 नियुक्ति वाले राज्यों में से नौ में इसी साल विधानसभा चुनाव भी हैं।
 
हिंदी पट्टी के बड़े राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नवंबर में चुनाव होने हैं संभवत: सरकार ने किसी रणनीति के तहत यह फैसला लिया है। फिलहाल उम्मीद की जा सकती है कि नए राज्यपाल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करते हुए पुराने विवादों को खत्म करेंगे और नए विवादों की गुंजाइश नहीं रहने देंगे।