रामपुर : अब्दुल्ला दो बार बने विधायक लेकिन दूसरी बार भी विधायकी पर गहराया संकट
2017 में पहली एमएलए बने तो फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र मामले में दो साल नौ माह में चली गई विधायकी, दूसरी बार 11 महीने बाद ही गहराया संकट
रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम स्वार-टांडा विधान सभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए लेकिन, दूसरी बार भी उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है। पहली बार उन्होंने वर्ष 2017 में बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को शिकस्त दी थी। इसके बाद वह अब्दुल्ला आजम के नाबालिग होने का मामला हाईकोर्ट में ले गए और अब्दुल्ला की विधायकी महज दो साल नौ माह में चली गई थी। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अब्दुल्ला सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े और उन्होंने पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां के पुत्र हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां को करारी शिकस्त दे दी। लेकिन छजलैट प्रकरण में दो साल की सजा होने से 11 माह के भीतर ही विधायकी पर संकट गहरा गया है।
- जिले में पांच विधानसभाओं में सपा की तीन और भाजपा की थीं दो सीटें
- आजम की विधायकी जाने पर उपचुनाव में भाजपा ने हथिया ली यह सीट
छजलैट में 15 वर्ष पूर्व 2008 में मुजफ्फरनगर जाते हुए छजलैट में उनके वाहन की तलाशी पर उन्होंने और उनके पिता आजम खां ने रोड जाम कर दिया था। छजलैट प्रकरण में एमपी एमएलए कोर्ट ने सोमवार की देर शाम अब्दुल्ला आजम को दो साल की सजा सुनाई है। विधायक या सांसद को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी विधायकी स्वत: ही रद्द मानी जाती है। मुरादाबाद कोर्ट द्वारा छजलैट प्रकरण में दो वर्ष की सजा सुनाए जाने पर अब्दुल्ला आजम की विधायकी पर एक बार फिर संकट गहरा गया है।
पिछले साल मार्च में अब्दुल्ला दोबारा विधायक बने थे। अब फरवरी में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई है। ऐसे में सिर्फ 11 माह में उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है। अब्दुल्ला आजम ने मार्च 2017 में स्वार-टांडा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। उनके प्रतिद्वंदी नवाब काजिम अली खां ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी थी कि अब्दुल्ला न्यूनतम आयु को पूरा नहीं करते हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 में अब्दुल्ला की विधायकी रद्द कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला होने से उप चुनाव नहीं हो सका था।
अब्दुल्ला ने पहले नवेद फिर हमजा को हराया था
वर्ष 2022 में अब्दुल्ला ने सपा के टिकट पर स्वार-टांडा से एक बार फिर चुनाव लड़ा और उनके मुकाबले में पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के पुत्र हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां ने भाजपा समर्थित अपना दल (एस) से ताल ठोंकी। लेकिन, पिता नवेद मियां के बाद पुत्र हमजा मियां को भी अब्दुल्ला ने चुनाव में करारी शिकस्त दे दी। अब्दुल्ला को विधान सभा चुनाव जीते पूरा साल भी नहीं गुजरा है और छजलैट प्रकरण में मुरादाबाद एमपी एमएलए कोर्ट ने 15 वर्ष पुराने मामले में दो साल की सजा सुना दी है।
वर्ष 2022 में स्वार-टांडा विधानसभा क्षेत्र में इनको इतने मिले थे वोट
अब्दुल्ला आजम को मिले वोट- 126162
हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां- 65059
जीत का अंतर- 61103
जिले में सपा की तीन और भाजपा की जीतीं थीं दो सीटें
वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा के तीन प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी जबकि, भाजपा को महज दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था। 28 अक्टूबर 2022 को पूर्व मंत्री आजम खां को भड़काऊ भाषण मामले में सजा सुनाए जाने के बाद हुए उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना उर्फ हनी ने सपा प्रत्याशी आसिम राजा को करारी शिकस्त दी थी। फिलहाल, भाजपा के पाले में तीन और सपा के खाते में दो सीटें रह गई थीं।
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