ग्लोबल वार्मिंग का असर

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Edited By Amrit Vichar
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ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक तापमान बढ़ने का मतलब है कि पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग को 21वीं शताब्दी का सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा है। आशंका जताई जा रही थी कि ग्लोबल वार्मिंग खाद्य सुरक्षा के लिए संकट पैदा कर सकती है। यह वास्तविकता नजर आने लगी है। मौसम का गरम होता मिजाज गेहूं की फसल पर भारी पड़ने की संभावना है।

कृषि सचिव मनोज आहूजा ने बताया कि तापमान वृद्धि के प्रभाव की निगरानी के लिए समिति का गठन किया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के इस अनुमान के बीच उठाया गया है कि मध्य प्रदेश को छोड़कर प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में अधिकतम तापमान फरवरी के पहले सप्ताह के दौरान पिछले सात वर्षों के औसत से अधिक था। यहां तक कि मौसम विभाग ने आगामी दिनों में गुजरात, जम्मू, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है।

अध्ययनों से पता चलता है कि गर्म वातावरण में गेहूं और चावल का उत्पादन अपेक्षा से कम होता है। वैश्विक तापमान वृद्धि से भारत के समुद्री तटों पर बसे राज्यों जैसे महाराष्ट्र व गुजरात आदि में फसलों की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। गर्मी के कारण कीट पतंगों की संख्या में वृद्धि कृषि पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। हालांकि सचिव ने कहा कि जल्दी बोई जाने वाली किस्मों पर तापमान में वृद्धि का असर नहीं होगा।

यहां तक कि गर्मी प्रतिरोधी किस्मों को भी इस बार बड़े क्षेत्रों में बोया गया है। फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.21 करोड़ टन रहने का अनुमान है। कुछ राज्यों में लू की स्थिति के कारण पिछले वर्ष गेहूं का उत्पादन मामूली रूप से घटकर 10 करोड़ 77.4 लाख टन रह गया था। कृषि वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूक, सतर्क और सचेत हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नेतृत्व में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विकसित करने की पहल की जा रही है। आशा है कि ग्लोबल वार्मिंग पर अंकुश लगाने के उपायों के साथ इसका सामना करने की तकनीकों को अपनाने से हमें इसके बुरे प्रभावों को कम करने में कामयाबी मिलेगी। ध्यान रहे ग्लोबल वार्मिंग को रोकने का कोई इलाज नहीं है। इसके बारे में सिर्फ जागरूकता फैलाकर ही इससे लड़ा जा सकता है। पृथ्वी को सही मायनों में ‘ग्रीन’ बनाना होगा। हम अपने आस-पास के वातावरण को प्रदूषण से जितना मुक्त रखेंगे, इस पृथ्वी को बचाने में उतनी ही बड़ी भूमिका निभाएंगे।

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