कृषि में तकनीक
कृषि भूमि लगातार सिकुड़ रही है जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में कृषि के संदर्भ में आ रहीं सभी चुनौतियों का एकजुट होकर सामना करने की आवश्यकता है। समय की मांग है कि भारत में कृषि-प्रौद्योगिकी के महत्व और चुनौतियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में तकनीक की उपेक्षा करना विवेकपूर्ण नहीं होगा। क्योंकि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अत्यंत उपयोगी साबित हुई है। अब किसान उन क्षेत्रों में फसल उगाने में सक्षम हैं, जिन क्षेत्रों में पहले फसलें नहीं उगाती थीं। कृषि-प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे सकने के लिए सरकार की नीतियां और कार्यक्रम प्रायः अपर्याप्त, असंगत या अक्षमता से कार्यान्वित किए गए हैं, जो उनकी प्रभावशीलता को कम करते हैं।
डिजिटलीकरण की ओर भारत की प्रगति के बावजूद किसानों की बड़ी संख्या की डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी तक पहुंच नहीं है, जिससे कृषि-प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाना चुनौतीपूर्ण है। ध्यान रहे कृषि-प्रौद्योगिकी उद्योग अपनी उच्च मांग के कारण देश में एक सतत भविष्य के निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में सुधार लाने में मशीनीकरण एक महत्वपूर्ण कारक रहा है।
कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप कृषि क्षेत्र में नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी और आधुनिक अभ्यासों का प्रवेश सुनिश्चित कर कृषि रूपांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप कृषि तकनीकों में सुधार, दक्षता में वृद्धि, वित्त तक पहुंच आदि द्वारा कृषि रूपांतरण में योगदान कर सकते हैं। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने ‘एग्रीस्टैक’-कृषि में प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों के एक समूह के निर्माण की योजना तैयार की है।
आगामी वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश के बजट में एग्रीटेक स्टार्ट अप को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है।
कृषि प्रधान राज्य यूपी में 188.40 लाख हेक्टेयर जमीन खेती योग्य है। राज्य में चार कृषि विश्वविद्यालयों में एग्रीटेक स्टार्टअप योजना के संचालन के लिए 20 करोड़ के बजट की व्यवस्था की गई है।
साथ ही किसानों की आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सरकार ने कृषि अनुसंधान के लिए यूपी के बजट में ‘द मिलियन फार्मर्स स्कूल’ कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया है, ताकि किसानों को नई तकनीक और उन्नत खेती का प्रशिक्षण दिया जा सके। इस कड़ी में साल 2023-24 में 17,000 किसान पाठशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।
कुल मिलाकर किसानों को खेती में आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की खरीद एवं उपयोग के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी तथा वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर ऐसा किया जा सकता है।
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