हल्द्वानी: एमडी-एमएस कोर्स शुरू कराने में लापरवाही बरत रहे विभागाध्यक्ष

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Edited By Amrit Vichar
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 हल्द्वानी, अमृत विचार। राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन तीन विभागों में 11 साल बाद भी एमडी व एमएस का कोर्स शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह विभागाध्यक्षों का लापरवाह रवैया है। सूत्रों की माने तो विभागाध्यक्ष छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहते, इसलिए एमडी व एमएस कोर्स शुरू कराने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
 

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में पीजी की 67 सीटें हैं। जिसमें से आधी स्टेट कोटे और आधी ऑलइंडिया कोटे की हैं। कॉलेज में साल 2011 से पीजी की सीटें आरंभ हो गई थी। जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, बाल रोग विभाग, नाक, कान व गला, नेत्र रोग, महिला एवं प्रसूति रोग विभाग, एनेस्थिसिया, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फॉरेंसिक, टीबी चेस्ट, कम्युनिटी मेडिसिन, फार्माकोलॉजी व एनाटॉमी विभाग को एमडी व एमएस कोर्स की मान्यता मिल चुकी है, लेकिन चर्म रोग, अस्थि रोग और मानसिक रोग विभाग को अभी तक मान्यता नहीं मिल पाई है। जबकि चर्म और अस्थि रोग विभाग में फैकल्टी की कमी नहीं है। वहीं, मानसिक रोग विभाग फैकल्टी की कमी से जूझ रहा है।

बताया जाता है कि कुछ विभागाध्यक्ष ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं होने दिया, तो कुछ ने कोर्स शुरू होने में रूचि नहीं ली। सूत्रों के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सक एमडी व एमएस का कोर्स शुरू कराना ही नहीं चाहते हैं। क्योंकि कोर्स शुरू होने से उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। इस जिम्मेदारी से बचने के लिए विभागाध्यक्ष कोर्स शुरू नहीं कराना चाहते हैं। अगर विशेषज्ञ चिकित्सक ही तैयार नहीं होंगे तो आने वाले समय में कौन पढ़ायेगा? यह बड़ा सवाल है।

विभागाध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
मेडिकल कॉलेज में वर्षों से जमे विभागाध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर अब धीरे-धीरे सवाल उठने लगे हैं। कभी कर्मियों तो कभी चिकित्सक के उत्पीड़न की बात आए दिन सामने आ रही है। इस उत्पीड़न के कारण कई नौकरी तक छोड़ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार कई विभागाध्यक्ष सुबह अस्पताल में हाजिरी लगाने आते हैं, उसके बाद गायब हो जाते हैं। पूछने पर बाहर गया हूं जवाब मिलता है।

 

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