हल्द्वानी: बेसिक से एलटी में आए शिक्षकों ने 1 जून से आरपार का किया ऐलान
हल्द्वानी, अमृत विचार। राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच ने आरोप लगाया कि बेसिक से एलटी में आए शिक्षकों के साथ छलावा हुआ है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि बेसिक की सेवा जोड़ते हुए चयन प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया गया तो 1 जून से आरपार की जाएगी।
मंच की शुक्रवार को वर्चुअली बैठक हुई। बैठक में उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बीती 31 अगस्त 2016 को तत्कालीन शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने एलटी में गए शिक्षकों को चयन प्रोन्नत वेतनमान का लाभ देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था।
बीती 5 सितंबर 2017 को मुख्यमंत्री ने शिक्षा सचिव को तत्काल पदोन्नत शब्द के स्थान पर समायोजन शब्द इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश भी कागजों में ही रह गए। इस बाबत मंच ने बीती 15 अक्टूबर 2020 को अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से वार्ता की थी लेकिन यह वार्ता भी वादों तक ही सीमित रह गई। आरोप लगाया कि अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवानियमावली 2006 के नियम 16(1) मे समायोजन/पदोन्नति में भर्ती की प्रक्रिया का प्रावधान था इसमें गुपचुप ढंग से संशोधन कर जारी हुई नियमावली 2014 के नियम 16(1) में समायोजन शब्द को हटा दिया।
इस संशोधन से बेसिक से एलटी में आए शिक्षकों को पदोन्नत माना गया और बेसिक की सेवा जोड़ते हुए इनका चयन प्रोन्नत वेतनमान देय था। उन्हें चयन प्रोन्नत वेतनमान देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि इस लाभ के लिए सेवा अवधि की गणना एलटी में आने की तिथि से होगी । वक्ताओं ने इसे छलावा करार दिया। अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने कहा कि सेवा शर्तों में संशोधन की प्रक्रिया में जिसके सेवा लाभ प्रभावित हो रहे हों उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था। इस बाबत अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से वार्ता करेंगे।
संघर्ष मंच के अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर 1जून से निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने प्रभावित शिक्षकों से मार्च में परीक्षा एवं अप्रैल में मूल्यांकन निपटने के बाद आरपार के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। इस दौरान शैलेन्द्र राणा, हरीश गैरोला, माधवी नेगी, रूप सिंह, हर्षवर्धन शुक्ला, जगदीश भट्ट, जगदीश जोशी, राजीव लोचन भंडारी, नवीन जोशी, हिमांशु पांडे, मीना रावत, मनोज बाला, हरिशंकर आदि थे ।
