पंजाब के हालात
इन दिनों पंजाब में खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी सिख संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े लोगों की सक्रियता चिंतित करने वाली है। रविवार को पंजाब के लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को कॉल कर अज्ञात व्यक्ति ने बम से उड़ा देने की धमकी दी। आरोपी ने खुद को ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह का साथी बताया।
राज्य के अजनाला में गुरुवार को अमृतपाल सिंह की अगुवाई में एक अन्य खालिस्तान समर्थक की रिहाई की मांग को लेकर किया गया उपद्रव इस बात के संकेत दे गया कि पंजाब में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। ध्यान रहे अजनाला हिंसा के बाद से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू और अमृतपाल में लगातार जुबानी जंग छिड़ी हुई है। अब इस तरह की धमकी आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता की बात है। रवनीत प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अगर प्रदेश सरकार हालात को संभालने में सक्षम नहीं है तो केंद्र सरकार को राज्य का कार्यभार संभालना होगा। अमरिंदर सिंह ने कहा कि हर दिन ड्रोन पकड़े जा रहे हैं, मुझे लगता है कि केंद्र को इसे जरूर देखना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि अमृतपाल को पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पंजाब में फिर से खालिस्तान का मुद्दा भड़काने के लिए दुबई से भेजा गया है। आशंका जताई जा रही है कि यह राज्य में चार दशक के बाद खालिस्तान आंदोलन की शुरुआत है।
एक माह पहले पंजाब के डीजीपी ने कहा था कि अमृतपाल का पंजाब में उदय हो रहा है। सत्ता और पुलिस प्रशासन के बीच कम्युनिकेशन गैप की वजह से चुनौतियां और बढ़ सकती है। हाल के महीनों में पंजाब में ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिनसे वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे है। जानकारों के मुताबिक अमृतपाल स्वयं को भारतीय नागरिक भी नहीं मानता। जिन लोगों ने इस आंदोलन की वजह से पंजाब को बर्बाद होते हुए देखा है उनका पंजाब के ताजा घटनाक्रम से चिंतित होना स्वाभाविक है।
पंजाब प्रदेश पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और पाकिस्तान मौके की तलाश में है। यदि समय रहते सख्त कदम न उठाए गए तो पंजाब में एक बार फिर आतंकवाद की जड़ें मजबूत हो सकतीं हैं,जो देश कि एकता,संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती बन सकती है।
