बढ़ते कदम
भारत में डिजिटल क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है और डिजिटल तकनीकी से लाखों लोगों के जीवन में एक नया मोड़ आया है। बुधवार को एक कार्यक्रम में दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डिजिटल तकनीक अब परिपक्व हो गई है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा, 5 जी और क्वॉन्टम कंप्यूटिंग मुख्यधारा की प्रौद्योगिकी बनने के लिए तैयार हैं।
भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बेमिसाल ढांचा तैयार किया है, जो लोगों के जीवन में बदलाव लाने पर केंद्रित है। महत्वपूर्ण है कि कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स भी उपस्थित थे। वास्तव में डिजिटल संरचना के विकास में भारत की प्रगति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।
कोरोना महामारी के दौरान हेल्थकेयर से लेकर कृषि, वित्तीय तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास में जिस तरह डिजिटल तंत्र उपलब्ध कराया गया और लोगों ने इसे अपनाया भी, उससे यह संकेत मिलता है कि देश में सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी में पूरे आर्थिक परिदृश्य के लिए अभूतपूर्व क्षमता मौजूद है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान, जन धन योजना, यूपीआई और डिजीलॉकर जैसे तमाम प्रयासों से देश में डिजिटल तकनीकी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डिजिटल तकनीकी की दुनिया में आज 80 करोड़ भारतीय ऑनलाइन जुड़े हैं। वहीं 2025 तक 40 करोड़ और लोग डिजिटल दुनिया में प्रवेश करेंगे। भारत में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने से बड़े बदलाव आए हैं। भारत डिजिटल भुगतान में दुनिया में पहले स्थान पर है। आज 130 करोड़ भारतीयों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में सरकार की ओर पहुंचता है।
देश में डिजिटल की इतनी बड़ी कल्पना नहीं की गई थी। 2023 के बजट में इस दिशा में व्यापक क़दम उठाए गए हैं। इसमें युवाओं को सशक्त बनाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल इंडिया स्किल सेंटर खोलने, डिजिटल लाइब्रेरी और युवा कौशल प्रोग्राम आदि शामिल हैं। इसके साथ ही डिजिटल क्षेत्र में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 5जी सेवाओं पर आधारित अनुप्रयोगों के लिए 100 प्रयोगशालाएं स्थापित करने की भी घोषणा की गई है।
कुछ चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद डिजिटल इंडिया मिशन ने सशक्त समाज बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार, सरकारी सेवाओं में सुधार और देश के हर गांव को बुनियादी परियोजना से जोड़ने की दिशा में बेहतर प्रगति शामिल हैं।
अभी इस दिशा में और अधिक कदम उठाने के लिए कुछ बदलाव करना जरूरी है। राज्यों द्वारा प्रोत्साहन देने, महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी योजनाओं को अमल में लाने और समन्वय स्थापित करने के प्रयासों में बुनियादी बदलाव लाए जाने की आवश्यकता है।
