बरेली:  गुजरे जमाने की बात हो गया कपड़ा खरीदकर सिलवाना

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Edited By Amrit Vichar
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रेडिमेड और ऑनलाइन बाजार ने ठंडा किया टेक्सटाइल कारोबार, ज्यादातर टेलर भी गुजर रहे हैं तंगी के हालात से

बरेली, अमृत विचार। होली के लिए कपड़ों की खरीदारी जोरों पर है। कोविड की पाबंदियों से मुक्त बाजार में भीड़ उमड़ रही है। इसके बावजूद ऑनलाइन रेडिमेड मार्केट की तुलना में सूटिंग शर्टिंग की ओर लोगों का रुझान न के बराबर है। इसी वजह से टेलरों का काम भी मंदा हो गया है। होली पर दिनरात व्यस्त रहने वाले टेलर एक-एक ग्राहक के लिए तरस रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ पुराने लोगों में ही अब कपड़े सिलवाकर पहनने का चलन रह गया है। बाकी तो सब रेडिमेड के दीवाने हो गए हैं।

कटरा मानराय, सिविल लाइंस और बड़ा बाजार समेत शहर के कई इलाकों में सूटिंग शर्टिंग के बड़े शोरूम हैं लेकिन होली के मौके पर भी इनमें सन्नाटा छाया हुआ है। कुछ साल पहले तक इन्हीं शोरूम में होली पर महीने भर पहले से भीड़ लगनी शुरू हो जाती थी। लोग थान से कपड़ा कटवाकर ले जाते थे लेकिन अब यह सब गुजरे जमाने की बात हो गई है। इन शोरूम पर होली पर भी अब इक्कादुक्का लोग ही आते हैं। शादी-ब्याह में जरूर कुछ अच्छी खरीदारी हो जाती है लेकिन होली कई सालों से सूनी ही गुजर जाती है।

युवाओं का रुझान पूरी तरह ऑनलाइन खरीदारी पर होने से छोटे व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऑनलाइन कपड़ा पसंद न आने पर बदला भी जा सकता है। लोग घर बैठे चीजें मंगा रहे हैं- राकेश अग्रवाल, टेक्सटाइल कारोबारी कटरामानराय।

युवा वर्ग खरीददारी के लिए घर से नहीं निकल रहा है। वह पूरी तरह ऑनलाइन शापिंग पर निर्भर है। ऑनलाइन का चलन बढ़ने से पुराना बाजार ठप सा हो गया है। होली पर दुकानों पर भीड़ होती थी मगरअब नहीं है -राजीव अरोरा टेक्सटाइल कारोबारी।

ऑनलाइन मार्केट ने शोरूम का क्रेज कम कर दिया है। गांव का पढ़ा-लिखा वर्ग भी ऑनलाइन खरीदारी कर रहा है। युवा बाजार में आ ही नहीं रहा, घर बैठे खरीदारी कर रहा है। सामान घर में पहुंच रहा है तो बाजार आए भी क्यों - राजेश छाबड़ा, सिविल लाइंस।

टेलर बोले- 80 फीसदी कम हो गए ग्राहक
सूटिंग-शर्टिंग शोरूम के साथ टेलर मास्टर भी इसी संकट से गुजर रहे हैं। कभी होली पर इतना काम होता था कि तमाम लोगों के कपड़े समय पर नहीं दे पाते थे लेकिन अब काम ही नहीं है। उनका कहना है कि कुछ बड़े टेलरों को छोड़ दें तो मोहल्लों में भी होली पर इतना काम रहता था कि महीना भर पहले ही लोग नाप दे जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। दर्जी चौक, बिहारीपुर ढाल, बड़ा बाजार के टेलर बताते हैं कि होली का 80 फीसदी कारोबार खत्म हो गया है। रेडिमेड सस्ता होना इसकी बड़ी वजह है। हालांकि यह संकट ज्यादातर जेंट्स टेलर्स के ही सामने है। लेडीज टेलरों के पास अब भी इतना काम है कि उन्हें इन दिनों सांस लेने की फुर्सत नहीं है।

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