Holi 2023 : Hamirpur के इस गांव में पुरुषों को भगाने के बाद घूंघट वाली महिलाएं खेलती होली, जानिए इसकी वजह

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Edited By Amrit Vichar
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Holi 2023 हमीरपुर के एक गांव में पुरुषों को भगाने के बाद घूंघट वाली महिलाएं होली खेलती।

Holi 2023 हमीरपुर के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के कुंडौरा गांव में की होली बड़ी अनोखे अंदाज में होती है। इसमें घूंघट वाली महिलाएं गांव के पुरुषों को भगाने के बाद होली खेलती है। महिलाओं की फाग निकालकर होली खेलने की तैयारियां अब शुरू हो गई।

हमीरपुर, अमृत विचार। Holi 2023 जिले के एक ऐसा गांव जहां सिर्फ घूंघट वाली महिलाएं ही एक दिन होली खेलती हैं। ये परम्परा कई दशकों से चली आ रही है। जिसमें सभी पुरुषों को भी महिलाओं की होली शुरू होने से पहले गांव छोड़कर खेत और खलिहान जाना पड़ता है। महिलाओं की फाग निकालकर होली खेलने की तैयारियां अब शुरू कर दी गई है।
 
घूंघट वाली महिलाओं की होली सुमेरपुर थानाक्षेत्र के सिर्फ कुंडौरा गांव में होती है। होली भी बड़े ही अनोखी ढंग से खेली जाती है, जिसमें गांव की बुजुर्ग महिलाएं भी धमाल करती हैं। होली के दूज त्योहार पर सभी बुजुर्ग और घूंघट वाली महिलाएं पहले रामजानकी मंदिर में एकत्र होती हैं। यहां पूजा अर्चना करने के बाद बुजुर्ग महिलाएं फाग गाती है। फिर महिलाएं टोलियां बनाकर गांव की हर गली और धार्मिक स्थानों से होते हुए धमाल करती है। महिलाओं की टोलियों का नेतृत्व बुजुर्ग महिलाएं करती है। ढोलक और मजीरा बजाते हुए घूंघट की ओट में फाग गाते डांस भी करती है।
 
गांव की बुजुर्ग देवरती ने बताया कि पिता का घर छोड़कर ससुराल आने पर उन्हें होली की परम्परा का हिस्सा बन रही है। बताया कि हर साल बड़े ही अनोखे ढंग से मस्ती की होली खेली जाती है। गांव की सरपंच सरिता देवी ने बताया कि देश के किसी भी कोने में ऐसी होली कही नहीं होती है जिसमें पूरे गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से होली खेलती है। बताया कि होली त्योहार की खास बात यह है कि महिलाओं की होली और फाग कार्यक्रम शुरू होने से पहले एक भी पुरुष व नौजवान गांव में नहीं दिखाई देता है।
 
सिर्फ बीमार पुरुषों को ही घरों में रहने की छूट रहती है। गांव के प्रधान के प्रतिनिधि एपी सिंह ने बताया कि सिर्फ एक ही दिन महिलाएं सामूहिक रूप से फाग निकालकर होली पर मस्ती करती है। महिलाओं की फाग और होली के कार्यक्रम से पहले सभी पुरुष गांव से बाहर खेतों की तरफ निकल जाते है। ये लोग तभी वापस गांव लौटते है जब महिलाओं की होली का समापन हो जाता है।

 

ढोलक और मजीरा लेकर महिलाएं पूरे गांव में गाती हैं होली की फाग

सरिता देवी ने बताया कि महिलाओं की अनोखी होली का इतिहास काफी पुराना है। बहुएं भी फाग की धूम में खूब डांस करती हैं। यह कार्यक्रम रामजानकी मंदिर से प्रारम्भ होता है। ढोलक और मजीरा बजाते हुए बुजुर्ग और घूंघट वाली महिलाएं सामूहिक रूप से फाग निकालती हैं। गिरजा और देवरती कुशवाहा ने बताया कि पूरे गांव में महिलाओं की टोलियां फाग निकालने के बाद एक जगह एकत्र होती हैं। फाग की धूम शाम तक चलती है।
 

होली में ठुमके लगाने की फोटो खींचने पर दी जाती है जुर्माने की सजा

बुजुर्ग महिला देवरती कुशवाहा ने बताया कि होली का रंग बड़ा ही रोमांच भरा होता है, जब हर घर की महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होती हैं। बताया महिलाओं की होली की फाग निकलने से पहले ऐलान किया जाता है कि जो भी पुरुष और नौजवान घर में हों वह गांव से बाहर चले जाएं। पुरुषों के गांव से बाहर जाने के बाद महिलाओं की होली शुरू होती है। किसी पुरुष ने महिलाओं को ठुमके लगाते देखा तो उसकी खैर नहीं रहती और तो और फोटो लेने पर भारी जुर्माना बोला जाता है।

 

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