बरेली: डेढ़ लाख फार्म फिलहाल बोरों में बंद., कहीं सांस न तोड़ दे पैसे वापस मिलने की आस
शासन से नहीं मिला कोई नया आदेश, एडीएम एफआर कार्यालय में आए करीब डेढ़ लाख निवेशकों के फार्मों को बोरियों में ठूंसा गया
बरेली, अमृत विचार। चिट फंड कंपनियों के जाल में फंसकर करोड़ों गंवाने वाले निवेशकों का अपनी डूबी रकम वापस मिलने का सपना फिलहाल प्रशासन ने बोरों में कैद कर दिया है। यह खबर भी उन करीब डेढ़ लाख निवेशकों को मायूस कर सकती है कि उनसे पूरा ब्योरा लेने के बावजूद अब तक शासन ने यह साफ नहीं किया है, उनकी रकम कब और कैसे वापस मिलेगा, मिलेगी भी या उनकी यह आस भी बोरों में कैद रहते-रहते सांस तोड़ देगी।
जिले में निवेशकों की ओर से अपनी डूबी रकम और उन्हें ठगने वाली कंपनियों का ब्योरा भरकर फार्म जमा करने का सिलसिला अब भी जारी है। तहसील और ब्लॉक कार्यालयों में यह फार्म जमा करने वालों की अब भी लाइन लग रही है। अब तक करीब 1.50 लाख फार्म जमा होने की बात अफसर दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से निवेशकों के फार्म जमा करने के लिए एडीएम एफआर को नोडल अफसर बनाया गया है लेकिन इन फार्मों का क्या किया जाएगा, इस संबंध में उन्हें कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। बरेली की तरह यही स्थिति दूसरे जिलों की भी है मगर आगे क्या होना है, यह रहस्य अब तक बरकरार है।
तहसीलों और ब्लॉक कार्यालयों में जमा फार्मों को एडीएम एफआर के कार्यालय में इकट्ठा किया गया है। फार्मों के ढेर लगने के बाद इन्हें बोरियों में ठूंसा जा रहा है ताकि कार्यालय से हटाकर इन्हें किसी दूसरी जगह रखा जा सके। निवेशकों की ओर से फार्मों में कुल कितनी रकम का ब्योरा दर्ज किया गया है, इसकी जांच नहीं हो रही है।
इन फार्मों में दिया गया ब्योरा ऑनलाइन फीड किया जाना है, लेकिन इसकी रफ्तार फिलहाल इतनी धीमी है कि अगर ऐसे ही फीडिंग की गई तो इसमें सालों लग जाएंगे। प्रशासन की ओर से इन फार्मों को ऑनलाइन फीड करने के लिए अलग से कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया गया है। कार्यालय के लोग ही दूसरे कामों से फुर्सत मिलने फीडिंग करते हैं। यह भी कभी हो पाता है और कभी नहीं।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अफसर के मुताबिक गृह मंत्रालय के निर्देश पर संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना उत्तर प्रदेश के निदेशक ने निवेशकों से फार्म भरवाकर जमा कराने का आदेश दिया था, लेकिन निवेशकों को रकम वापस दिलाने के संबंध में शासन से कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
उप्र वित्तीय अनुष्ठान में जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम 2016 एक्ट बनाने के लिए भी कोई उच्च स्तरीय बैठक नहीं हुई है। न एडीएम वित्त एवं राजस्व स्तर के अफसरों को नोडल अधिकारी बनाकर ट्रेनिंग दी गई। कोई और निर्देश जारी न होने की वजह से यह कहना मुश्किल है कि निवेशकों की रकम मिलेगी या फार्म बोरियों में ही भरे रखे रहेंगे। फिलहाल जिले में फार्म जमा करने का क्रम जारी है।
निवेशकों के फार्म अब भी जमा कराए जा रहे हैं। कार्यालय में इकट्ठे फार्मों को बोरियों में भरवाकर दूसरी जगह रखवाया जाएगा। निवेशकों की डूबी रकम वापस दिलाने के बारे में शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। कोई निर्देश मिलने के बाद उसके अनुरूप आगे कार्रवाई की जाएगी---संतोष बहादुर सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
निवेशकों की भीड़ ने ताजा कीं नोटबंदी की यादें
चिट फंड कंपनियों में पैसे जमा करके गंवाने वाले निवेशकों की उम्मीद पूरी होंगी या नहीं, ये तो फिलहाल कोई कहने की स्थिति में नहीं है लेकिन फार्म जमा करने के लिए जिस कदर भीड़ उमड़ी, उससे नोटबंदी के दौरान की यादें जरूर ताजा हो गईं। करीब डेढ़ महीने से फार्म जमा करने का सिलसिला चल रहा है। शुरू से ही इस कदर भीड़ उमड़ी कि फार्म जमा करने वाले बाबुओं के पसीने छूट गए। लोग तड़के आकर लाइनों में लगने के बाद फार्म जमा करने के लिए पूरे-पूरे दिन खड़े रहे। इसके बावजूद फार्म जमा नहीं हो पाया तो उन्हें दूसरे दिन फिर आना पड़ा।
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