बरेली: चार साल में भी नहीं बनीं सड़क, चुनाव में मुद्दा बनेगी संजय नगर रोड

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। संजय नगर की चार साल से अधूरी पड़ी सड़क को बनाने का झुनझुना थमा दिया गया है। निवर्तमान मेयर डा. उमेश गौतम ने लगभग तीन माह पहले सड़क बनवाने की घोषणा करते हुए एक सप्ताह में टेंडर करने की बात कही थी लेकिन इस पर भी कोई कार्यवाही तो हुई नहीं। ऐसे में नगर निगम की खराब आर्थिक स्थिति का खुलासा हो गया।

चार साल से अधूरी सड़क अब पांचवें साल में बननी शुरू हो जाएगी। यह ख्वाब निवर्तमान मेयर पांच वार्डाें की जनता को दिखा गये। सपना दिखाया कि अधूरी सड़क के बजाए पूरी 1200 मीटर लंबी सीसी रोड बनाई जाएगी। इसके लिए दो करोड़ 80 लाख रुपये का बजट भी जारी करने की बात कही गई थी। यह बजट 15वें वित्त के अवशेष राशि को उपयोग करने के लिए दिसंबर 22 में हुई बैठक में जारी किया गया था। बैठक में 15वें वित्त मद में अवशेष 20 करोड़ रुपये से विभिन्न कार्यों को करने की जानकारी दी गई थी।

बैठक को हुए तीन माह बीत गए लेकिन अभी तक इस सड़क के निर्माण का कार्य शुरू नहीं होने पर लोग घोषणा को सपना बताने लगे हैं। क्षेत्रीय निवासी धर्मवीर ने बताया कि सड़क बनने की घोषणा होने से पांच वार्डों के साथ-साथ क्षेत्रीय लोग भी प्रसन्न हुए थे, लेकिन तीन माह बाद काम की शुरुआत होने की कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही। अब तो अप्रैल में चुनाव होने की बात कही जा रही है। 

इस क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए कई लोग इच्छुक हैं और अब वे भी सड़क नहीं बनने को लेकर मायूस हैं। बताते हैं कि संजय नगर की सड़क शहर के दो मार्गों को जोड़ती है। इस मार्ग से ब्रह्मपुरा, संजय नगर, सुरेश शर्मा नगर, जोगीनवादा, छोटी विहार वार्ड सहित अन्य वार्डाें के निकलने वाले लोग भी परेशान हैं।

सूत्रों ने बताया कि संजय नगर रोड को बनाने के लिए अभी टेंडर नहीं निकला है। उधर ठेकेदार भी पहले कराए गए काम का पैसा नहीं मिलने से नया काम लेने से कतरा रहे हैं। ठेकेदारों का भी कहना है कि अब निगम में काम करने के बाद पैसा मिलने का भरोसा नहीं रह गया है। इसलिए वे भी चाहते हैं फंसा हुआ बस पैसा मिल जाए।

दिसम्बर में चुनाव की सरगर्मी के बीच हुई थी घोषणा
दिसम्बर के अंत या जनवरी में नगर निगम चुनाव होने की सरगर्मी के बीच संजय नगर की बहुप्रतीक्षित सड़क का निर्माण करा कर चुनावी लाभ लेने की योजना पर जब पानी फिरा, तो नेता भी शांत हो गये। पहले माना जा रहा था कि आचार संहिता नहीं लगी और टेंडर खुल गया तो सड़क बन जाएगी, लेकिन चुनाव टल गया तो किसी नेता ने सड़क बनवाने पर ध्यान नहीं दिया।

मैं नगर निगम के कार्यां के बारे में अब अफसरों से पूछताछ करता नहीं हूं। इसलिए वे भी निश्चिंत हैं। मैंने टेंडर निकालने की बात कही थी। क्या मामला था जो टेंडर नहीं हुआ। मैं सोमवार को अफसरों से इस प्रकरण की जानकारी करूंगा---डा. उमेश गौतम, निवर्तमान मेयर।

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