मुरादाबाद: ड्योढ़ी पर सांकल की आहट नहीं रही, घूंघट उतर गया, शर्माहट नहीं रही

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हिंदी साहित्य सदन के तत्वावधान में मुक्तक संग्रह का लोकार्पण

मुरादाबाद, अमृत विचार। रचनाकार डॉ. अजय अनुपम के ताजा मुक्तक संग्रह ''ओवेराम'' का लोकार्पण शनिवार को हिंदी साहित्य सदन के तत्वावधान में श्रीराम विहार कालोनी स्थित विश्रांति भवन में किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत कवयित्री डॉ. पूनम बंसल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई।

डॉ. अजय अनुपम ने मुक्तक ने सुनाया कि ड्योढ़ी पर सांकल की आहट नहीं रही, घूंघट उतर गया, शर्माहट नहीं रही। हाय-हलो पर सिमट गई दुनियादारी, रिश्तों के भीतर गर्माहट नहीं रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यश भारती डॉ. माहेश्वर तिवारी ने कहा कि डा. अनुपम के मुक्तक संभावना से सार्थकता तक की यात्रा के साक्षी हैं। 

निश्चित रूप से वह मुक्तकों के रूप में साहित्य की भावी पीढ़ी को एक रास्ता दिखा रहे हैं। मुख्य अतिथि व्यंग्य कवि डा. मक्खन मुरादाबादी ने कहा कि अनुपम के मुक्तक जीवन की धुकर-पुकर के मुक्तक हैं, जिन्हें उन्होंने पिया भी है और जिया भी है। 

विशिष्ट अतिथि केके गुप्ता रहे। संचालन नवगीतकार योगेन्द्र वर्मा व्योम ने किया। शायर ज़िया जमीर ने कहा कि डॉ. अजय अनुपम का यह दूसरा मुक्तक संकलन देर तक याद रखा जाएगा। कवि राजीव प्रखर ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की। शायर डॉ. आसिफ हुसैन, कवयित्री डॉ. पूनम बंसल, डॉ. अंजना दास, राजन राज, ज्योतिर्विद विजय दिव्य, सुशील शर्मा आदि ने भी डॉ. अजय को बधाई दी।

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