बरेली: ऑफिशियल लिक्विडेटर ने रबड़ फैक्ट्री मजदूर संघ से कर्मचारियों का डाटा मांगा

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 बरेली, अमृत विचार। कारपोरेट कार्य मंत्रालय के ऑफिशियल लिक्विडेटर (आधिकारिक परिसमापक) बाम्बे हाईकोर्ट ने रबड़ फैक्ट्री की यूनियन रबड़ फैक्ट्री मजदूर संघ के अध्यक्ष प्यारे लाल से भी कर्मचारियों का डाटा मांगा है। डिप्टी ऑफिशियल लिक्विडेटर वीजी निपेन ने 22 फरवरी को संघ के अध्यक्ष प्यारेलाल को संबोधित पत्र भेजकर 9 मार्च को कागजातों के साथ उपस्थित होने के लिए कहा था लेकिन चोटिल होने की वजह से प्यारेलाल मुंबई नहीं जा सके थे। अब वह दो अन्य पदाधिकारियों के साथ 18 मार्च को मुंबई के लिए निकलेंगे। 20 मार्च को ऑफिशियल लिक्विडेटर के कार्यालय में उपस्थित होकर 1500 कर्मचारियों का डाटा सबूतों के साथ सौंपेंगे।

अध्यक्ष प्यारेलाल का कहना है कि चोटिल अवस्था होने की वजह से 9 मार्च को न आने के संबंध में ऑफिशियल लिक्विडेटर को पत्र पहले ही भेज दिया था। 1500 कर्मचारियों का करीब 1200 करोड़ रुपये का दावा उनके द्वारा पहले किया गया था। इस बार भी इतनी धनराशि की मांग करते हुए डाटा सौंपा जाएगा।

2014 में उन्होंने ही बॉम्बे हाईकोर्ट में कर्मचारियों के हक के लिए केस दायर किया था। इधर ऑफिशियल लिक्विडेटर की ओर 22 फरवरी को प्यारे लाल को भेजे गए पत्र में लिखा है कि इस कार्यालय ने 1990 दावेदारों की सूची संकलित की थी। 1431 दावों से जुड़े कितने मामलों में और प्रमाण जैसे जन्म तिथि या नियुक्ति की तारीख का प्रमाण या अंतिम वेतन पर्ची की प्रति आवश्यक है। कुछ मामलों में आवासीय पता भी उपलब्ध नहीं है।

कंपनी रजिस्टर और अन्य प्रासंगिक दस्तावेज जो संघ के कब्जे में हैं, चार्टर्ड एकाउंटेंट मैसर्स अग्रवाल पानी और कंपनी को उपलब्ध कराए गए थे, समेत अन्य सभी रिकॉर्ड कार्यालय को उपलब्ध कराएं। 200 से अधिक दावे हैं जो हलफनामे में शामिल नहीं हैं, क्योंकि ये 200 दावे कंपनी अदालत नियम 1959 के नियम 148 के तहत अधिसूचित अंतिम तिथि के बाद दायर किए गए हैं।

इन दावों को नियम के तहत खारिज किया जाएगा। पत्र के अनुसार यह देखा गया है कि कुछ कर्मचारी व्यक्तिगत भत्ता प्राप्त करने के हकदार हैं लेकिन व्यक्तिगत भत्ते की पात्रता की प्रकृति और शर्तों की व्याख्या नहीं है। उनके बारे में भी बताना होगा। अंतिम सूचना देकर आपको अवगत कराया है कि अतिरिक्त साक्ष्य संकलित करके अपने दावों के अधिनिर्णय के संबंध में अंतिम व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित हों लेकिन प्यारेलाल मुंबई नहीं जा सके थे।

आशीष अग्रवाल ने केस ट्रांसफर की लगातार पैरवी की थी
रबड़ फैक्ट्री केस की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की दूसरी बेंच या सुप्रीम कोर्ट में कराने की मांग के संबंध में फतेहगंज पश्चिमी के युवा अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष आशीष अग्रवाल की चिट्ठियों का बड़ा असर हुआ है। आशीष अग्रवाल ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों शिकायती पत्र भेजे थे। दावा किया है कि पत्राचार की वजह से सुनवाई दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुई है। इससे राज्य सरकार को लाभ मिलेगा।

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