प्रो. अल्का मिश्रा व डॉ किरण लता डंगवाल ने बढ़ाया लखनऊ विश्वविद्यालय का मान
अमृत विचार लखनऊ: दो महिला प्रोफेसरों ने लखनऊ विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है। यहां विश्वविद्यालय की खगोल शास्त्र की एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉ अल्का मिश्रा को उत्तर प्रदेश के विज्ञान तथा तकनीक विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट अवार्ड प्रदान किया गया है। वहीं दूसरी विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की शिक्षिका डॉ. किरण लता डंगवाल को यूनेस्को का अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन मेंटरिंग कार्यक्रम में मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स के डेवलपर के रूप में चयनित किया गया है।
प्रो. अल्का मिश्रा को इसलिए मिला अवार्ड
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि खगोल शास्त्र की एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉ अल्का मिश्रा जो अवार्ड दिया गया उसमें प्रोजेक्ट क्षेत्र में विशेष उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिको और अनुसंधानकर्ताओं को प्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न विषयों में महत्वपूर्ण क्षेत्रों और बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए दिया जाता है। इसी तारतम्य में डा अल्का मिश्रा को "अलौकिक जीवन की खोज में हास्य वातावरण और इंटरस्टेलर अंतरिक्ष में प्रतिक्रियाओं पर प्रतिक्रिया व्यवहार्यता और आणविक गुहाओं के प्रभाव का अध्ययन" के लिए अवार्ड दिया गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत होने वाले अनुसंधान के द्वारा इंटरस्टेलर मीडियम ( तारों के मध्य पाया जाने वाला स्थान अर्थात अंतरतारकीय स्थान ) मे बायोमाॅलिकियूलस के निर्माण की अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जायेगा। इनटरस्टेलर माध्यम में इन बायोमोलेक्यूल्स की उपस्थिति से अन्य ग्रहों पर जीवन की उत्पत्ति की संभावनाओं तथा पृथ्वी पर जीवन उत्पत्ति की प्रारंभिक अनसुलझी कडियों को जोडने मे मदद मिलेगी । इस प्रकार के अध्ययन से ब्रह्मांड के निर्माण , विकास और जीवन की उत्पत्ति को समझने में भी मदद मिलती है । इसके अतिरिक्त धूमकेतुओं जो अपने और अपने वातावरण में अनेक कार्बनिक पदार्थ समाहित किये होते हैं ,उसके अंदर होने वाली रासायनिक क्रियाओं पर भी शोध करी जाती है क्योंकि ये पृथ्वी पर जीवन उत्पत्ति के जनक माने जाते हैं।
डॉ. किरण लता डंगवाल ने विश्वविद्यालय को बढ़ाया विदेश में मान
लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की शिक्षिका डॉ. किरण लता डंगवाल को यूनेस्को का अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन मेंटरिंग कार्यक्रम में मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स के डेवलपर के रूप में चयन हुआ है। डा. डंगवाल ने सतत प्रेरणा और मार्गदर्शन के कारण अपनी इस उपलब्धि का श्रेय कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय को दिया है। उनकी ये कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मुक्त शिक्षा की क्षमता का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डॉ. डंगवाल इस कोर्स को हरियाणा की डॉ. कविता बत्रा के साथ विकसित करेंगी ।
इस कोर्स की समन्वयक कोलकाता से प्रो. सुभा दास मोलिक व मेंटर इसहाक मुलोलानी हैं, जो कनाडा में रेजिना विश्वविद्यालय से हैं। (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) आज के डिजिटल युग में समय की अनिवार्य आवश्यकता बन गए हैं। कोर्स किसी के कौशल और ज्ञान को सीखने और बढ़ाने के लिए एक लचीला, लागत प्रभावी और सुलभ तरीका प्रदान करते हैं। डिजिटल साक्षरता के बढ़ते महत्व और निरंतर सीखने की आवश्यकता के साथ, कोर्स समय की एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए डॉ डंगवाल का चयन उनकी उत्कृष्ट विद्वता, अनुसंधान और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस एमओओसी के विकास में उनका योगदान दुनिया भर के शिक्षार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और अनुभव से लाभ उठाने में सक्षम करेगा।
