बायोमास के जलने से बिगड़ रही Delhi की हवा, IIT Kanpur के विशेषज्ञों के अध्ययन से मिली यह जानकारी
कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञों से जानकारी मिली।
कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञों से जानकारी मिली। बायोमास के जलने से दिल्ली की हवा बिगड़ रही। वहीं, असमय मौतों में से 18 प्रतिशत के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है।
कानपुर, अमृत विचार। दिल्ली में रात के समय भारी मात्रा में कणीय प्रदूषण बायोमास जलाने के उत्सर्जन के कारण होता है। यह जानकारी आईआईटी के प्रो. सचिदानंद त्रिपाठी ने दी। उन्होंने बताया कि नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व आईआईटी कानपुर कर रहा है। जिसमें भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), पॉल शेरर इंस्टीट्यूट (पीएसआई) स्विट्जरलैंड और हेलसिंकी यूनिवर्सिटी, फिनलैंड ने योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अक्सर कणीय प्रदूषण की उच्च मात्रा का अनुभव होता है, जिसे धुंध भी कहा जाता है।
उनके उत्पत्ति के सटीक कारण अब तक अज्ञात थे। संपूर्ण शोध ने दिल्ली में सर्दियों के दौरान अनुभव की जाने वाली गंभीर धुंध की घटनाओं के पीछे के कारण का पता लगाया, जो दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में से एक है। श्री त्रिपाठी ने बताया कि इंडो-गंगा के मैदान में आवासीय हीटिंग और खाना पकाने के लिए अनियंत्रित बायोमास जलने से अल्ट्राफाइन कण बनते हैं। यह दुनिया के प्रतिशत जनसंख्या के स्वास्थ्य और क्षेत्रीय जलवायु को प्रभावित करते हैं। अनियंत्रित बायोमास-दहन उत्सर्जन को विनियमित करने से रात धुंध निर्माण को रोकने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है। वायु प्रदूषण भारत से 18 फीसद मौतों के पीछे भी यही कारण है। बायोमास में लकड़ी, कंडे, पराली आदि आते हैं।
