व्यापक सुधार जरूरी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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नरेगा ने ग्रामीण किसानों और भूमिहीन मज़दूरों के लिए सुरक्षा कवच का में कार्य किया है। आत्मनिर्भरता के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रोजगार के लिए वर्ष 2005 में ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत नरेगा योजना की शुरुआत की थी। वर्ष 2009 में इसका नाम मनरेगा कर दिया गया।

इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा खड़ा करने की योजना थी। सार्वजनिक कार्रवाई में लगे नरेगा श्रमिकों, ट्रेड यूनियनों, संगठनों और व्यक्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव से मुलाकात की और कहा कि मनरेगा तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक मजदूरी भुगतान की विश्वसनीय और समय पर व्यवस्था नहीं की जाती।

मजदूरी भुगतान में देरी और अनिश्चितता कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य को विफल करती है और श्रमिकों की प्रेरणा को न केवल श्रमिकों के रूप में बल्कि योजनाकारों, मॉनिटरों और लेखा परीक्षकों के रूप में भी प्रभावित करती है।

यह दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक कल्याण कार्यक्रम है जिसने ग्रामीण श्रम में सकारात्मक बदलाव को प्रेरित किया है। वास्तव में कल्याणकारी राज्य की सफलता का आंकलन इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वहां सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के विकास को सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं।

समग्र विकास की इस पृष्ठभूमि में मनरेगा ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। ग्राम पंचायतों को सशक्त करने और समावेशी विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक  गरीब व सामाजिक रूप से कमज़ोर वर्गों, जैसे-मज़दूर, आदिवासी, दलित एवं छोटे सीमांत किसानों के बीच गरीबी कम करने में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  

मनरेगा के तहत आर्थिक बोझ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा साझा किया जाता है। भ्रष्टाचार मनरेगा से संबंधित एक बड़ी चुनौती है जिससे निपटना आवश्यक है। अधिकांशतः यह देखा जाता है कि इसके तहत आवंटित धन का अधिकतर हिस्सा मध्यस्थों के पास चला जाता है। एक अध्ययन में पता चला है कि मनरेगा के तहत किए जाने वाले 78 प्रतिशत भुगतान समय पर नहीं किए जाते।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मनरेगा मजदूरी में बढ़ोतरी की मांग को दोहराया। मंत्रालय के सचिव से मुलाकात में कहा कि उपस्थिति ऐप के आधार पर वेतन भुगतान के लिए दिन में दो बार श्रमिकों की तस्वीरों को समय पर अपलोड करने की आवश्यकता होती है, खराब कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में श्रमिकों को अक्सर उनके उचित वेतन भुगतान से वंचित कर दिया जाता है। सुधार किसी भी नीति के प्रमुख अंग होते हैं। आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योजना में व्यापक सुधार लाने की आवश्यकता है।