रामपुर : 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख अमृतपाल के पोस्टर लगाने वाले दोनों आरोपियों की जमानत मंजूर

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Edited By Amrit Vichar
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में अधिवक्ता के माध्यम से लगाया था प्रार्थना पत्र

रामपुर, अमृत विचार। खालिस्तान समर्थक एवं अलगाववादी संगठन  वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के अलावा उसके समर्थक खुफिया तंत्र के रडार पर चल रहे हैं। सोमवार को पुलिस ने दो लोगों को  धारा 153-बी में गिरफ्तार करने के बाद  जेल भेज दिया था। जिसमे मंगलवार को अधिवक्ता के माध्यम से  मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में  जमानत के लिए प्रार्थना पत्र लगाया। सुनवाई के बाद दोनों की जमानत स्वीकार कर ली गई है।

बिलासपुर में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के समर्थन में 26 मार्च को रैली निकाले जाने के पोस्टर चस्पा होने के बाद देश भर में हड़कंप मच गया था। लखनऊ और मुरादाबाद की एटीएस समेत कई खुफिया एजेंसियों ने बिलासपुर में डेरा डाल दिया था। 26 मार्च को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के पक्ष में शाम 4 बजे पुरानी मंडी से रैली निकालने का आह्वान किया गया था।

पुलिस की मुस्तैदी के चलते रैली तो नहीं निकली लेकिन, खुफिया एजेंसियों और पुलिस ने पोस्टर लगाने वालों के साथ ही वारिस दे पंजाब के प्रमुख के समर्थकों पर शिकंजा कसते हुए पोस्टर चिपकाने के चर्चित मामले का पटाक्षेप करते हुए कोतवाली पुलिस ने सोमवार को खजुरिया क्षेत्र के ग्राम गोदी निवासी मुजाहिद पुत्र फैयाज मियां तथा रतनपुरा गांव निवासी बचित्तर सिंह पुत्र जसवंत सिंह को आईपीसी की धारा 153 बी के तहत कार्रवाई  करते हुए जेल भेज दिया था। जिसके बाद उन्होने अपने अधिवक्ता मोहम्मद रेहान खां के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां पर मंगलवार को  जमानत पर  सुनवाई हुई। जिसके बाद दोनों को जमानत मिल गई।
 
खालिस्तानी समर्थक संगठन की धमकी के बाद हाई अलर्ट
बिलासपुर। खालिस्तानी समर्थक संगठन के प्रमुख की ओर से जी-20 समिट से पहले कई लोगों को धमकी भरा फोन किए गए। जिसमें उसके द्वारा उत्तराखंड के रामनगर को खालिस्तान का हिस्सा बताया है। जिसके बाद बार्डर एरिया होने के कारण उत्तराखंड सहित यूपी का खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया। इस धमकी को लेकर उत्तराखंड के साथ-साथ यूपी क्षेत्र में भी जी-20 की बैठक खत्म होने तक हाई अलर्ट जारी किया गया है। कोतवाली क्षेत्र में पुलिस द्वारा लगातार संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही है।

आपको बता दें कि प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन ‘सिख फार जस्टिस’ के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू की ओर से 27 मार्च को उत्तराखंड के रामनगर में होने वाली जी-20 की बैठक से पहले कई लोगों को धमकी भरा फोन किये गये। जिसमें कहा गया कि  रामनगर भारत का हिस्सा नहीं है। पंजाब को आजादी दिलाने के बाद रामनगर खालिस्तान का भाग बना लिया जाएगा । पन्नू ने रामनगर को खालिस्तान का हिस्सा बताते हुए बैठक के दौरान खालिस्तान के समर्थन में झंडे लगाने की भी बात कही है। उधर, खालिस्तान समर्थक और ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के फरार प्रमुख अमृतपाल सिंह और उसके साथियों की तलाश को लेकर जिले में भी पुलिस अलर्ट पर है।

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