बरेली: मलेरिया..! तो क्या बरेली को फिर यूपी में नंबर वन बनाएंगे
जिले में कई मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की बेपरवाही बरकरार, अब तक कोई कार्ययोजना ही नहीं बनी
बरेली,अमृत विचार। मलेरिया फैलना शुरू हो गया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की बेपरवाही बरकरार है। लार्वा पैदा होने के इसी समय संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू करने के निर्देश हैं लेकिन अफसर जैसे हालात बेकाबू होने का इंतजार कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण विभाग की गतिविधियां शून्य हैं, जबकि मलेरिया के 10 मरीज मिल चुके हैं।
पिछले सालों में मलेरिया के जिले में बेकाबू होने का दहलाने वाला इतिहास है। सैकड़ों लोगों की जान भी जा चुकी है, लेकिन जब भी ऐसी स्थिति पैदा होती है, स्वास्थ्य विभाग नियंत्रण की कोशिशों के बजाय पूरी ताकत मौतों का कारण अज्ञात बुखार साबित करने में लगाता है। इस बार भी मलेरिया नियंत्रण की तैयारी कागज पर जारी हो रहे आदेशों-निर्देशों से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। कोई कार्ययोजना तक नहीं बनी है, लिहाजा एक बार फिर आशंका सिर उठाने लगी है कि जिले के लोगों को मलेरिया के साथ जिंदगी और मौत के खेल में जूझना पड़ सकता है।
बता दें कि वर्ष 2018 में बरेली जिला मलेरिया के मामलों में प्रदेश में पहले स्थान पर था। 2019 में कोविड का दौर शुरू होने को कारण बताकर जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान ही नहीं चलाया गया। रिकॉर्ड पर मलेरिया के मरीजों की संख्या भी काफी कम दर्ज हुई। कोविड से दहशत के माहौल में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया पर जवाबदेही से बच गया। इस बार भी जिले में मलेरिया की रोकथाम के लिए अब तक कोई गतिविधि शुरू नहीं हुई है।
बारिश के बाद लार्वा के लिए अनुकूल माहौल, मगर जाग नहीं रहे अफसर
पिछले साल इन्हीं दिनों में मलेरिया विभाग की टीमें जिले में सक्रिय हो गईं थी। घर-घर जाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए जागरूक करना शुरू कर दिया गया था। दरअसल, मलेरिया का प्रकोप बारिश होने के बाद तेजी से बढ़ता है। इस बार कई दिन बारिश हो चुकी है। शहर से लेकर गांवों तक लार्वा के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बन चुका है। इस समय लार्वा को अपेक्षाकृत आसानी से नष्ट किया जा सकता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर अभी जागे ही नहीं हैं।
ये तो सिर्फ रिकॉर्ड है... पांच साल में एक लाख से से ज्यादा मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं, फिर भी इन्हीं आंकड़ों के मुताबिक पांच सालों में एक लाख से ज्यादा मलेरिया के मरीज रिकॉर्ड पर दर्ज हैं। 2018 में 37482, 2019 में 46717, 2020 में 11686, 2021 में 2362 और 2022 में 1805 मरीज जिले में मिले हैं।
सीएमओ बोले, एक अप्रैल से चलाएंगे अभियान
सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह के मुताबिक संचारी रोग नियंत्रण अभियान एक अप्रैल से शुरू होगा। इस दौरान संचारी रोगों से ग्रसित लोगों के साथ संभावित क्षय रोगियों की भी तलाश की जाएगी। फ्रंटलाइन वर्कर घर-घर जाकर जानकारी लेंगे। अभियान में ग्राम्य विकास विभाग, पशुपालन, बाल विकास एवं पुष्टाहार, शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तीकरण, कृषि, सिंचाई और उद्यान विभाग की मदद ली जाएगी। कोविड-19 और क्षय रोग की जांच कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लार्वारोधी फॉगिंग होगी।
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