शहर में प्रदूषण नहीं फैला पाएंगे पुराने वाहन
लखनऊ। पुराने वाहनों से निकलने वाले विषैले धुंए से शहर को बचाने के लिए आरटीओ ऑफिस ने कदम बढ़ा दिए हैं। इसी के चलते आरटीओ ऑफिस ने 15 साल पुराने दो और चार पहिया निजी वाहनों के री रजिस्ट्रेशन के आदेश जारी कर दिए हैं। अगले 30 दिन में 15 साल पुराने वाहनों ने री-रजिस्ट्रेशन …
लखनऊ। पुराने वाहनों से निकलने वाले विषैले धुंए से शहर को बचाने के लिए आरटीओ ऑफिस ने कदम बढ़ा दिए हैं। इसी के चलते आरटीओ ऑफिस ने 15 साल पुराने दो और चार पहिया निजी वाहनों के री रजिस्ट्रेशन के आदेश जारी कर दिए हैं। अगले 30 दिन में 15 साल पुराने वाहनों ने री-रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो उनका रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए निरस्त मान लिया जाएगा। इसके बाद ऐसे वाहन रोड पर मिले तो मोटर व्हैक्लि एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे वाहन जहां प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं वहीं इनका संचालन भी खतरनाक माना जाता है। इनसे दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। पुराने वाहनों की फिटनेस खराब होने के बाद भी लोग इन्हें जुगाड़ से चलाते रहते हैं। राजधानी में एक लाख से अधिक ऐसे वाहन चिन्हित किए गए है जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
इन वाहनों पर ही लगाम लगाने के लिए ही मंगलवार को उनके री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किए जाने का फैसला लिया गया। साथ ही ऐसे वाहनों को आज से 30 दिन का समय दिया गया है। 30 दिन के अंदर 15 साल पुराने वाहन के स्वामी री रजिस्ट्रेशन नहीं कराए तो उनके वाहनों का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा।
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ ऑफिस की एआरटीओ अंकिता शुक्ला ने बताया कि ऐसे वाहन स्वामियों को भी अपनी रिपोर्ट देनी होगी जिनके वाहन खड़े है या बेकार हो कर कबाड़ में बिक चुके हैं। उन्होंने बताया कि जो वाहन रोड पर चल रहे हैं उन्हें री-रजिस्ट्रेशन के लिए प्रदूषण जांच का सर्टिफिकेट लाना होगा। ऐसे में इन वाहनों से निकलने वाले धुंए को नियंत्रित किया जा सकता है। एक महीने की अवधि पूरी होने के बाद 15 साल पुराने हो चुके वाहनों के खिलाफ अभियान भी चलेगा।
