भरोसा कायम रखें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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पिछले छह दशक में सीबीआई ने बहुआयामी और बहु अनुशासनात्मक जांच एजेंसी के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। मुख्य रूप से सीबीआई की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार से देश को मुक्त करने की है। क्योंकि जहां भ्रष्टाचार होता है वहां युवाओं को उचित अवसर नहीं मिलते। सोमवार को सीबीआई के हीरक जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से गुलामी के कालखंड से भ्रष्टाचार की एक विरासत हमें मिली है।

भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा होता है। आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजनीतिक  इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है। सीबीआई को कहीं पर भी हिचकने, कहीं रुकने की जरूरत नहीं है। सीबीआई ने अपने काम से सामान्य जन को एक विश्वास दिया है।

जब किसी को लगता है कि कोई केस असाध्य है, तो आवाज़ उठती है कि मामला सीबीआई को दे देना चाहिए। लोग आंदोलन करते हैं कि केस सीबीआई को दे दो। यहां तक कि पंचायत स्तर पर भी कोई मामला आता है, तो लोग कहते हैं-इसको तो सीबीआई के हवाले करना चाहिए।

वास्तव में अपने शुरुआती चरण में जनता का सीबीआई पर बहुत भरोसा था। क्योंकि यह निष्पक्षता और स्वतंत्रता का प्रतीक था। बाद में समय के साथ, हर प्रतिष्ठित संस्थान की तरह, सीबीआई भी गहरी सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गई है और इसके कार्यों व निष्क्रियता को लेकर कुछ मामलों में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

इसी के चलते पिछले वर्ष उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमना ने एक कार्यक्रम में कहा कि राजनीतिक कार्यकारिणी या कार्यपालिका बदल जाएगी, लेकिन एक संस्था के रूप में सीबीआई स्थायी है, इसे अभेद्य और स्वतंत्र रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया था कि एक स्वतंत्र अम्ब्रेला इंस्टीट्यूशन के निर्माण की तत्काल आवश्यकता है, ताकि सीबीआई तथा ईडी जैसी विभिन्न एजेंसियों को एक छत के नीचे लाया जा सके।

इस निकाय को एक कानून के तहत बनाया जाना आवश्यक है, जो स्पष्ट रूप से अपनी शक्तियों, कार्यों और अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करता हो।  

आज सीबीआई का दायरा काफी बड़ा हो चुका है। बैंक धोखाधड़ी से लेकर, वाइल्ड लाइफ से जुड़े हुए अपराधों, यानी महानगर से लेकर जंगल तक सीबीआई को दौड़ना पड़ रहा है। संगठित अपराध से लेकर, साइबर क्राइम तक के मामले सीबीआई देख रही है। यानि सीबीआई पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में सामान्य जन का भरोसा बनाए रखना कोई साधारण बात नहीं है। साइबर क्राइम जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अभिनव तरीके खोजने चाहिए और भविष्य की चुनौतियों पर मंथन भी आवश्यक है।