कटौती का असर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति कम होने से कीमतें बढ़ सकती हैं। हाल ही में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक व सहयोगी देशों ने हर रोज करीब 19 करोड़ लीटर तेल उत्पादन में कटौती करने का निर्णय लिया है। अकेले सऊदी अरब पिछले साल की तुलना में पांच प्रतिशत कम तेल उत्पादन करेगा।

इसी तरह इराक ने रोजाना करीब दो लाख बैरल तेल का उत्पादन कम करने की बात कही है। उधर यूक्रेन के साथ जारी टकराव के बीच रूस ने खुलासा किया है कि तेल निर्यात से मिलने वाले राजस्व में जनवरी में सालाना स्तर पर 46 प्रतिशत की गिरावट हुई है। चीन की ओर से लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते ऐसे हालात बने हैं।

यानि सस्ते दाम पर रूस से तेल की उपलब्धता बीते दिनों की बात हो सकती है। तय है अगर तेल का उत्पादन कम होता है और उससे तेल की कीमत बढ़ती है तो उसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अरब देश दलील दे रहे हैं कि दुनिया की आर्थिकी में मंदी की आहट के बीच तेल उत्पादन में कटौती की गई है।

इन देशों ने भांप लिया है कि दुनिया के बैंकिंग संकट व युद्ध के चलते मंदी की आहट है। उससे खपत कम होने से बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है। ओपेक का उद्देश्य अपने सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना तथा उपभोक्ता को पेट्रोलियम की कुशल, आर्थिक व नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल बाज़ारों का स्थिरीकरण सुनिश्चित करना है। हालांकि कई लोगों का आरोप है कि ओपेक एक कार्टेल की तरह व्यवहार करता है, जो तेल की आपूर्ति का निर्धारण करता है और विश्व बाज़ार में इसकी कीमत को प्रभावित करता है।