संशय पर विराम
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कोविड-19 से लड़ने के लिए गठित पीएम केयर्स फंड को पूरी तरह वैध बताया तो कई दिनों से चले आ रहे मामले का पटाक्षेप भी हो गया। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा इस पैसे को राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) में स्थानांतरित करने की मांग खारिज करते …
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कोविड-19 से लड़ने के लिए गठित पीएम केयर्स फंड को पूरी तरह वैध बताया तो कई दिनों से चले आ रहे मामले का पटाक्षेप भी हो गया। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा इस पैसे को राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) में स्थानांतरित करने की मांग खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब राज्य सरकारों को कोविड-19 से लड़ने के लिए इस फंड से पैसा दिया जा रहा है तो इसकी वैधता पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता है।
दरअसल पीएम केयर्स फंड के गठन के बाद से ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा था कि इस फंड में पैसा प्रधानमंत्री के नाम से आया है, लिहाजा इस फंड के बारे में पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए। सूचना के अधिकार के तहत इसकी जानकारी भी मांगी गई तो मामला और तूल पकड़ गया। इस बीच गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर कहा कि पीएम केयर्स फंड को एनडीआरएफ में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। इस मामले में जहां तक पारदर्शिता का विषय है तो इस बात को जानने का अधिकार देश के नागरिकों को है कि आपात स्थिति में गठित किए गए एक फंड का पैसा उस स्थिति में कितना काम आ रहा है।
केंद्र सरकार ने इस बारे में जानकारी दी कि पीएम केयर्स फंड में जमा कुल 3100 करोड़ रुपयों में से 1 हजार करोड़ रुपये राज्यों को उनके प्रवासी नागरिकों की वापसी में मदद के लिए दिए गए। यह भी कहा कि निजी संस्था द्वारा इस फंड का ऑडिट किया जाएगा। इसी ऑडिट को लेकर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाते हुए कहा था कि ऐसे कोष का ऑडिट कैग के द्वारा किया जाता है, मगर यहां ऐसा नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह कोष सरकारी नहीं है बल्कि धर्मार्थ न्यास है। इसमें कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से दान कर सकता है। कोर्ट के फैसले के बाद पीएम केयर्स फंड को लेकर चला आ रहा विवाद भी समाप्त हो गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने तो पीएम केयर्स फंड को लेकर अपना फैसला दे दिया है, मगर केंद्र सरकार को भी विपक्ष के सभी सवालों का जवाब दे देना चाहिए। चूंकि केंद्र ने इसी फंड से राज्यों की मदद की है, इसके अलावा वैक्सीन निर्माण के लिए इस फंड से पैसा दिया है, लिहाजा इस फंड में आए पैसे के सदुपयोग को लेकर किसी भी सवाल का जवाब देने में उसे कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए ताकि आगे कोई विवाद की स्थिति पैदा न पैदा हो।
