गरीब कैदियों की मदद
केंद्र सरकार गरीब कैदियों की मदद के लिए आगे आई है। सरकार ने जेलों में भीड़ कम करने के उद्देश्य से महज जुर्माना भरने या जमानत की राशि देने में अक्षम होने के कारण जेल में बंद कैदियों के लिए विशेष आर्थिक सहायता योजना शुरू करने का फैसला लिया है।
वास्तव में यह फैसला गरीब कैदियों के लिए जेल से बाहर आने में लाभकारी होगा जिनमें से अधिकांश सामाजिक रूप से वंचित या कम शिक्षित और निम्न आय वर्ग से हैं। देशभर की जेलों में ऐसे हजारों कैदी बंद हैं जिनके पास जमानत लेने के लिए या उन पर लगाए गए जुर्माने की राशि चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं जबकि उनकी कैद की अवधि पूरी हो चुकी है या फिर वे विचाराधीन हैं।
गत वर्ष दिसंबर माह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमानत मिलने के बावजूद छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेलों में बंद गरीब और आदिवासी विचाराधीन कैदियों की दुर्दशा और दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाया था। कुछ दिनों बाद उच्चतम न्यायालय ने ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करने के लिए उनका विवरण मांगा था। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के अनुसार पिछले वर्षों में जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या लगातार बढ़ी है। यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में सभी कैदियों का 76 प्रतिशत विचाराधीन हैं। इनमें आधे से अधिक मुस्लिम, दलित या आदिवासी हैं।
गौरतलब है कि जुर्माने की राशि या जमानत राशि भरने में अक्षम कैदियों को वित्तीय सहायता मुहैया कराने संबंधी इस योजना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल अपने बजट भाषण में की थी। देश में कारागारों की स्थितियों को देखते हुए योजना का लाभ गरीब कैदियों तक पहुंचे यह सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। सरकार की ओर से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान अमल में लाए जाएंगे। ई-प्रिज़न प्लेटफार्म को सशक्त बनाया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मजबूत किया जाएगा और जरूरतमंद गरीब कैदियों आदि को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हितधारकों को संवेदनशील बनाने के साथ ही उनका क्षमता निर्माण किया जाएगा।
कारागार आपराधिक न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कानून के प्रभाव को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्र की ओर से जेलों में सुरक्षा ढांचे को बेहतर और आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। सरकार जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर विभिन्न कदम उठाती रही है। सरकार ने अब गरीब कैदियों के लिए सहायता के दायरे का विस्तार किया है, यह समयोचित है।
