बरेली कॉलेज में नहीं जलाए जाएंगे सूखे पत्ते, तैयार हो रही खाद
कॉलेज के एनएसएस छात्र इकाई प्रथम ने तैयार की वर्मी कंपोस्ट इकाई
बरेली, अमृत विचार। बरेली कॉलेज में सूखे पत्तों को अब जलाया नहीं जाएगा। इन पत्तों से खाद तैयार कर इनका फिर से पेड़-पौधों में इस्तेमाल किया जाएगा। कॉलेज के एनएसएस छात्र इकाई प्रथम ने प्रयोग के तौर पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट (केंचुआ खाद इकाई) स्थापित की है। कुछ दिनों बाद इसमें खाद तैयार हो जाएगी। इसके पैकेट भी तैयार किए जाएंगे और न्यूनतम दाम पर बेचा जाएगा।
कॉलेज का परिसर लगभग 75 एकड़ में फैला हुआ है। जिसमें बड़ी मात्रा में पेड़-पौधों से पत्तियां इत्यादि जैविक कूड़ा- करकट वर्ष भर गिरता रहता है। ऐसे जैविक कूड़ा करकट से इकाई में वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी। खाद को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 45 दिन से ज्यादा का समय लगता है। इस समय खाद इकाई के चार बेड बनाए गए हैं और प्रायोगिक तौर पर सफल होने पर इसे उत्तर प्रदेश शासन के सहयोग से महाविद्यालय में स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।
एनएसए छात्र इकाई प्रथम के नोडल अफसर और वनस्पति विज्ञान के सहायक प्रो. राजीव यादव ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट खाद के उपयोग से पेड़ पौधों में वृद्धि तेजी से होती है और पौधों का स्वास्थ्य भी उत्तम रहने के साथ मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी कई गुना तक बढ़ जाती है। केंचुआ खाद के उपयोग के कारण मिट्टी में मौजूद मनुष्य के हितकारी जीवाणु की संख्या में वृद्धि होती है और उन पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है।
इसके उपयोग द्वारा ऊसर भूमि को भी सुधारा जा सकता है और इस भूमि में खरपतवार भी कम उगते हैं। इकाई संचालन में कैलाश, सुनील वर्मा, सचिन, चंद्रप्रकाश, अनिकेत सिंह, हर्ष कश्यप, अरबाब रजा खां, गीतांश, हर्षित,अमन मिश्रा, अमन यादव , अनुराग, आयुष मिश्रा, स्वाले, आदर्श, समीर, प्रतीक, अवनीश, सौरभ, गौरव, शलव गुप्ता, अनुज, पंकज कुमार, पंकज गौतम, अभिषेक राठौड़, विनोद, वसीम, मिथुन, मुनीश, शिवम कुमार, राजकुमार आदि स्वयंसेवक सहयोग कर रहे हैं।
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