UPPSC Success Story : 'डिप्टी एसपी मेरी मंजिल नहीं है, मुझे तो अभी और आगे जाना है'
साक्षात्कार : यूपीपीएससी में चयनित डिलारी की ब्लाक प्रमुख पूनम सिंह की बेटी आयुषी सिंह से अमृत विचार की बातचीत
आयुषी का माला पहनाकर स्वागत करती मां पूनम व अन्य।
आशुतोष मिश्र,अमृत विचार। संभावना बीज में होती है। बीज ही पत्थर का भी सीना चीर देता है। बीज ही वृक्ष का आकार लेता है। यह सत्य समझने के लिए हमने जो किरदार चुना है, वह हैं आयुषी सिंह। आयुषी का चयन यूपीपीएससी 2022 में हुआ है। यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। मुरादाबाद की स्थानीय राजनीति में बाहुबल से जगह बनाने वाले ब्लाक प्रमुख योगेंद्र सिंह भूरा की बेटी ने यह खुशी घर वालों को दी है। जिस स्थिति में आयुषी ने अपनी मेधा का झंडा गाड़ा है वह लोगों में कौतूहल का विषय भी है।
किशोर वय में बेटी को चौखट पर पिता का रक्तरंजित शव देखना पड़ा, मगर अपनी प्रतिज्ञा से तनिक भी डिगी नहीं। पुलिस विभाग में डिप्टी एसपी के लिए चयनित बिटिया इसे अभी मंजिल नहीं मानती। कहती हैं कि हमें अभी आगे जाना है। भारतीय प्रशासनिक सेवा मेरा सपना और संकल्प है। महानगर की आशियाना कालोनी के एचआईजी, ए-120 पर शनिवार की सुबह उत्साह का डेरा रहा। आयुषी की मां डिलारी की प्रमुख पूनम सिंह, भाई आदित्य और परिवार के सदस्यों के बीच मेले का नजारा रहा। सभी खुशी से
गदगद थे।
अमृत विचार से बातचीत में आयुषी ने विविध पक्षों पर खुलकर बात की। वह कहती हैं कि यह अभी असल सफलता नहीं है। यह तो अभी मेरे पापा का सपना पूरा हुआ है। मुझे एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी बनना है। इस बार हमारी प्राथमिकता एसडीएम थी। लेकिन, डिप्टी एसपी मिला है। कहती हैं कि सिविल सर्विसेज की तैयारी कठिन होती है। इसलिए हमें बड़े धैर्य से आगे बढ़ना है। इस चयन के लिए कई बार कुछ आवेदकों को कई प्री, मेंस और इंटरव्यू देना होता है। इस लक्ष्य को पाने में में बहुत उतार-चढ़ाव होते हैं। इसलिए इसमें बेहद धैर्य से काम करना है।
बताती हैं कि मैंने पॉलिटिकल साइंस ऑप्शनल लिया था। 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए पॉलिटिकल साइंस और बाद मैंने 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एमए पॉलिटिकल साइंस किया। राजनीति विज्ञान विषय में यूजीसी नेट भी क्लियर किया। निजी जीवन और जीवन की चुनौतियों के सवाल पर वह सिलसिलेवार अपनी बात रखती हैं। बतातीं है कि पिताजी की हत्या के बाद घर की स्थिति बदल गई। उसमें हमने अपनी पढ़ाई जारी रखी। तभी हमने भी ठान लिया था कि अधिकारी बनकर पापा के सपने पूरे करने हैं। तब मैं 11वीं की छात्रा थी। 12वीं के बाद दिल्ली चली गई। वहीं, डीयू में एडमिशन लिया और आगे की तैयारी शुरू कर दी।
कचहरी में की गयी थी आयुषी के पिता की हत्या
शूटर रिंकू मर्डर केस में यहां जिला जेल में बंद योगेंद्र सिंह भूरा और उनके साथियों को 23 फरवरी, 2015 को पेशी पर कोर्ट लाया गया था। भूरा कोर्ट रूम के बाहर बनी बेंच पर बैठकर कोर्ट में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पुलिसकर्मी उनके पास तैनात थे। तभी वहां पहुंचे रिंकू के भाई सुमित ने भूरा के पैर छुए और फिर उन पर गोलियां दाग दी थीं। कचहरी में पुलिस अभिरक्षा में गोलियों से भूनकर भूरा की हत्या कर दी गई थी। भोजपुर क्षेत्र के गांव हुमायूंपुर निवासी डिलारी के तत्कालीन ब्लाक प्रमुख योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा का नाम चार मार्च 2013 को हुई छात्र नेता और शॉर्प शूटर रिंकू चौधरी की हत्या में सामने आया था। 20 जनवरी, 2014 को भूरा ने इस मामले में कोर्ट में समर्पण किया था और तभी से जेल में बंद थे।
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