खुद उपग्रह बनाएगी एनएसआईएल
नई दिल्ली/बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) की भूमिका में बदलाव कर उसे स्वयं उपग्रह बनाने और उपग्रह सेवा देने का अधिकार दिया जायेगा। इसरो ने आज बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योग के लिए खोलने और ‘इंडियन स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर’ (आईएन-स्पेस) के गठन …
नई दिल्ली/बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) की भूमिका में बदलाव कर उसे स्वयं उपग्रह बनाने और उपग्रह सेवा देने का अधिकार दिया जायेगा। इसरो ने आज बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योग के लिए खोलने और ‘इंडियन स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर’ (आईएन-स्पेस) के गठन के बाद एनएसआईएल की भूमिका में बड़ा बदलाव आयेगा।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा आयोजित वेबीनार में एक प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि एनएसआईएल को उपग्रह बनाने, उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष में अपने उपग्रह का स्वामित्व रखने के साथ वाणिज्यिक आधार पर उपग्रह सेवा प्रदान का भी अधिकार मिल जायेगा। अभी वह दूसरे ग्राहकों के उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए इसरो के माध्यम से सेवा प्रदान करती है।
कंपनी इस समय ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान और लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान का उद्योगों के माध्यम से इसरो के लिए निर्माण कराती है। नयी व्यवस्था लागू होने के बाद वह भूस्थैतिक प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) और जीएसएलवी-एमके3 का निर्माण भी शुरू कर देगी। अभी वह इसरो के मिशनों के वाणिज्यिक इस्तेमाल वाली सेवाएं ग्राहकों को प्रदान करती है, लेकिन भविष्य में वह स्वयं इसरो के मिशनों को अंजाम देगी।
एक प्रकार से अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता विकास के अलावा मिशनों से जुड़ी इसरो की लगभग सारी गतिविधियों को एनएसआईएल अंजाम देगी। अभी इसरो के अलावा किसी और संगठन के पास भारतीय उपग्रहों का अधिकार नहीं है, लेकिन भविष्य में निजी कंपनियों के साथ एनएसआईएल को भी उपग्रह रखने का अधिकार मिल जायेगा।
