संक्रमण और उम्मीद

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Edited By Amrit Vichar
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मार्च महीने में जब देशभर में लाकडाउन की शुरुआत हुई थी तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि देश में एक दिन में 70 हजार लोगों के संक्रमित होने का आंकड़ा सामने आएगा। मगर लाकडाउन के बाद अनलाक-2 के दौर में देश में रिकॉर्ड 69,652 मामलों के बाद महामारी फैलने की बढ़ती दर अब …

मार्च महीने में जब देशभर में लाकडाउन की शुरुआत हुई थी तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि देश में एक दिन में 70 हजार लोगों के संक्रमित होने का आंकड़ा सामने आएगा। मगर लाकडाउन के बाद अनलाक-2 के दौर में देश में रिकॉर्ड 69,652 मामलों के बाद महामारी फैलने की बढ़ती दर अब और चिंताजनक रूप में सामने आई है। चूंकि संक्रमण को रोकने के सारे उपाय किए जा चुके हैं, इसके बाद भी रिकॉर्ड रूप में लोग संक्रमित हो रहे हैं, तो यह सोचना गलत है कि संक्रमण की दर घटेगी। वह भी तब जन अनलाक-3 भी शुरू होने को है। अनलाक-3 में तमाम अन्य पाबंदियां भी हटेंगी। जाहिर है मामले कम तो होंगे नहीं।

दूसरी ओर हर्ड इम्यूनिटी जैसी बातों से भी चिकत्सा विशेषज्ञ ज्यादा उत्साहित नहीं हैं क्योंकि हर्ड इम्यूनिटी और इसके आने की स्थिति को लेकर चिकित्सा विज्ञानी एकमत ही नहीं हैं। कई अन्य टीकों, दवाओं से भी कोरोना पर काबू करने की कोशिशें की गई हैं मगर सफलता हाथ नहीं लगी है। एक तरफ कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले हैं तो दूसरी ओर दुिनयाभर में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल भी अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं। कई वैक्सीन परीक्षण के उत्साहजनक परिणाम आ रहे हैं। संक्रमण के रिकॉर्ड तोड़ मामलों के बीच यही राहत और उम्मीद की बात है।

इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि भारत बायोटेक और आईसीएमआर की ‘कोवैक्सिन’ इसी साल के अंत तक बाजार में आ जाएगी, तो यह बात महामारी के इस कुहासे में उम्मीद की एक किरण लेकर आई है। उनके मुताबिक केंद्रीय एक्सपर्ट ग्रुप ने 50 लाख डोज का पहला ऑर्डर देने की तैयारी कर ली है। सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मचारी, सुरक्षा बलों और अन्य समूहों को वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री की बातों के लिहाज से यह माना जा सकता है कि अगले वर्ष की शुरुआत या इसके कुछ महीनों बाद आम लोगों को भी वैक्सीन मिलने की शुरुआत हो जाएगी।

दरअसल वैक्सीन के ट्रायल में फूंक-फूंककर कदम रखने की आवश्यकता है और केंद्र सरकार बायोटेक और आईसीएमआर की ‘कोवैक्सिन’ को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है, जिसे साल के अंत तक लॉन्च करने की बात हो रही है। ऐसा किया भी जाना चाहिए क्योंकि वैक्सीन के बड़े सैंपल साइज परीक्षण और उसके संतोषजनक परिणामों के बगैर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है। थोड़ा देर ही सही, मगर साल के अंत तक अगर कोरोना वैक्सीन आती है तो यह राहत की बात होगी।