हिंसाग्रस्त सूडान
अफ्रीकी देश सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच संघर्ष के बढ़ने और हालात की अनिश्चिता से वहां को लेकर देश मंख चिंता की स्थिति बन गई है। वर्तमान में सूडान अस्थिर होने की ओर अग्रसर है। पिछले सात दिन से वहां भीषण लड़ाई हो रही है जिसमें करीब 300 से अधिक लोग मारे गए हैं।
राजधानी खार्तूम में गोली लगने से घायल एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। हिंसा प्रभावित देश में चार हजार से अधिक भारतीय नागरिक फंसे हैं। इस मामले को लेकर देश में सियासी विवाद भी शुरु हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार सूडान में आदिवासियों को बचाने के लिए कदम नहीं उठा रही है।
केंद्र सरकार ने अब तक फंसे लोगों को वापस लाने की पहल नहीं की। इस बीच दक्षिण अमेरिकी देशों की यात्रा पर निकले विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने सूडान की स्थिति को देखते हुए ही अमेरिका जाने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सूडान के जमीनी हालात बहुत ही तनावपूर्ण हैं।
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री न्यूयार्क (अमेरिका) में हैं जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुटेरस से सूडान की स्थिति पर चर्चा की। इससे पहले, उन्होंने सूडान में मौजूदा परिदृश्य पर चर्चा करने के लिए यूएई और मिस्र के विदेश मंत्रियों से बात की थी।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सूडान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ जमीनी स्थितियों की पहली रिपोर्ट पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने, घटनाक्रम पर करीब से नजर रखने और भारतीयों की सुरक्षा का लगातार मूल्यांकन करने व उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि सूडान में संघर्ष की जड़ें कई साल पुरानी हैं।
अप्रैल 2019 में तानाशाह ओमर अल बशीर को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। बताया जाता है कि बशीर ने ही जानबूझ कर ऐसे सैन्य तंत्र की रचना की थी जिससे सेना उनके खिलाफ कभी एक न हो सके। शुरू में सेना ने लोकतांत्रिक सरकार बनने में सहयोग की बात की, लेकिन अक्टूबर 2021 में सेना ने सत्ता अपने हाथ ले ली।
राजधानी खार्तूम के राजनयिकों ने 2022 के शुरुआत में ही चेता दिया था कि ऐसे हिंसक संघर्ष हो सकता है। सूडान को अफ्रीका का एक संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। यहां भी रूस और अमेरिका एक तरह से विरोधी ताकतों के पीछे नजर आते दिखते हैं।
तमाम हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि हिंसाग्रस्त सूडान में लोगों की जिंदगी खतरे में है। भारत अपने नागरिकों को सूडान से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तैयार है। राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। वहां की स्थिति का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। हर मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
