आर्थिक सफलता का आधार
पीएम मोदी(फाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती को लेकर पंचायत स्तर पर जन जागरुकता अभियान चलाया जाना चाहिए। रासायनिक खेती से धरती को नुकसान पहुंच रहा है। प्राकृतिक खेती को लेकर देश में व्यापक काम शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को रीवा (मप्र.) में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
भले ही हरित क्रांति प्रौद्योगिकियों ने भारतीय कृषि को कई गुना अधिक उत्पादक उद्यम में बदल दिया है। लेकिन रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता में गिरावट आई। आज कोई भी खाद्यान्न ऐसा नहीं है, जो जहरीला न हो। इन सभी चिंताओं ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया है और केंद्र सरकार भी इस खेती को प्रोत्साहित करने के लिए तत्पर है।
प्राकृतिक खेती में सिंथेटिक रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए स्वास्थ्य जोखिम और खतरे समाप्त हो जाते हैं तथा मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। इससे मिट्टी में पाए जाने वाले जीवाणुओं और अन्य जीवित जीवों जैसे केंचुओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) का उद्देश्य पारंपरिक स्वदेशी पद्धतियों को बढ़ावा देना है जो किसानों को बाहरी रूप से खरीदे गए उत्पादों से मुक्ति दिलाती है।
केंद्र सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धाति (बीपीकेपी) उप-मिशन के माध्यम से इस खेती को बढ़ावा दे रही है। दरअसल हमारे जीवन, स्वास्थ्य, समाज के आधार पर हमारी कृषि प्रणाली है। भारत प्रकृति और संस्कृति से एक कृषि आधारित देश रहा है।
इसलिए, जैसे-जैसे देश का किसान आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे हमारी कृषि आगे बढ़ेगी, समृद्ध होगी और देश भी प्रगति करेगा। सरकार ने प्राकृतिक खेती को नमामि गंगे परियोजना से जोड़ा है। गंगा नदी के किनारे प्राकृतिक कृषि गलियारा बनाने के लिए अलग अभियान चलाया गया है। इसका लक्ष्य तीन मुख्य उद्देश्यों से निपटना है: कृषि उत्पादकता और आय में लगातार वृद्धि करना, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन एवं निर्माण करना, साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना।
इसलिए प्राकृतिक खेती को अपनाना मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी उत्पादकता की रक्षा करने के समान है और यह आर्थिक सफलता का आधार भी है। अगर देश का किसान लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्पित हो जाए तो कोई भी बाधा रास्ते में नहीं आएगी। जनभागीदारी से बड़े से बड़ा कार्य भी सफल हो जाता है।
