नगर निकाय चुनाव: सात दिन में मतदाताओं की चुप्पी का सातवां फाटक तोड़ने की चुनौती
आशुतोष मिश्र, मुरादाबाद, अमृत विचार। निकाय चुनाव में अब मात्र सात दिन में मतदाताओं की चुप्पी का सातवां फाटक तोड़ना महापौर पद के उम्मीदवारों के सामने कड़ी चुनौती है। क्योंकि, भाजपा और कांग्रेस को छोड़ दें तो बाकी सभी दलीय और स्वतंत्र उम्मीदवारों को जनता के सामने स्वयं को बताना और मतदाताओं को अपने पक्ष में करना है। पहली बार निकाय चुनाव में पार्टियों को अपने चुनाव चिन्ह पर मतदाताओं को सहेजने का मौका मिला है। जबकि, स्वतंत्र उम्मीदवारों को आयोग के निर्धारित सिंबल पर लोगों का समर्थन हासिल करना है।
महापौर पद के उम्मीदवारों की बात करें तो सपा, बसपा, आप और आईएमआईएमआई के नए चेहरे मैदान में है। महापौर पद के कुल 12 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला महानगर के 947506 मतदाताओं को करना है। 4 मई को मतदान और 13 को चुनाव परिणाम की घोषणा होनी है। जनहित के मुद्दे पर संघर्ष और नागरिक सुविधाओं के लिए मेहनत की बात यहां बेमानी है। दिलचस्प तो यह कि भाजपा और कांग्रेस के अलावा सभी उम्मीदवार अचानक जनता के बीच हैं। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पूर्व विधायक हाजी युसुफ अंसारी ने वर्ष 2017 के चुनाव में तीसरा कोण बनाने का प्रयास किया था।
अब की रणनीतिकारों ने नया कार्ड खेला है। सपा ने निर्यातक रईस उद्दीन को महानगर की गलियों में उतारा है। वह संगठन की ताकत पर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि उनके विरोधी राजनीति में उनके नए प्रयोग की अपने ढंग से व्याख्या कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी ने मोहम्मद यामीन को मौका दिया है। वह पहले सपा में थे। नामांकन के दो दिन पहले बसपा में लौटे हैं। बीते चुनाव में मेयर पद के लिए पार्टी के लाखन सिंह सैनी दमखम के साथ मैदान में उतरे थे। यह दीगर बात है कि वह चुनाव में सफल तो नहीं हो पाये। लेकिन 32 हजार से अधिक लोगों का समर्थन पार्टी की झोली में डाला था।
सैनी सजातीय मतों पर मजबूत पकड़ रखने वालों में गिने जाते हैं। अब वह बसपा से नाता तोड़ चुके हैं। शहरी राजनीति के जानकार मेयर पद की जंग में कांग्रेस उम्मीदवार की स्थिति की नए सिरे से समीक्षा कर रहे हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में यहां भाजपा के विनोद अग्रवाल को कांग्रेसी रिजवान कुरैशी टक्कर दी थी। रिजवान दूसरे स्थान पर रहे और फिर मैदान में है। निवर्तमान मेयर विनोद अग्रवाल और समर्थक कांग्रेस की मौजूदा लड़ाई की अपने ढंग से समीक्षा कर रहे हैं। कांग्रेसी उम्मीदवार रिजवान कुरैशी मौजूदा समीकरणों में गुणा-गणित लगा रहे हैं।
उधर, चौपाल पर इस बात की चर्चा है कि अचानक चुनावी समर में कूदे कई दलीय उम्मीदवार और निर्दल मुंह की खाएं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कुल मिलाकर नौ दिनी जंग में सात दिन ही उम्मीदवारों के पास है, जो अपने व्यक्तित्व और सोच को लेकर मतदाताओं से मनुहार कर सकते हैं। निवर्तमान मेयर विनोद अग्रवाल की टीम प्रभावी जनसंपर्क अभियान में जुटी है। सपा, कांग्रेस, बसपा के अलावा सभी उम्मीदवारों के समर्थक प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं।
यह है मेयर के उम्मीदवार
चंदन भट्ट आम आदमी पाटी
मुमताज अहमद आईएमआईएमआई
मोहम्मद यामीन बहुजन समाज पाटी
रिजवान कुरैशी कांग्रेस
विनोद अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी
सैय्यद रईस उद्दीन समाजवादी पार्टी
अनवर निर्दल
जूही शबनम निर्दल
नितिन निर्दल
मासूमा निजाम निर्दल
मुद्दसिर निर्दल
शाहिद निर्दल
वर्ष 2017 के चुनाव में मिले मत
विनोद अग्रवाल - भाजपा - 94584
मो. रिजवान कुरैशी - कांग्रेस - 73029
मो. यूसुफ अंसारी - सपा - 47695
लाखन सिंह सैनी - बसपा - 32189
सरदार गुरविंदर सिंह - आप - 5564
नोट : 1634
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