Haldwani News: कुमाऊं की सड़कों पर हर साल जा रहीं सैकड़ों की जान, नहीं काम आ रहा सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियान
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं में हर साल लाखों देशी- विदेशी सैलानी यहां की खूबसूरत वादियों के दीदार के लिए पहुंचते हैं। यहां के पहाड़ जहां बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींचतें हैं वहीं इन वादियों से गुजरने वाली सर्पीली सड़कों में जोखिम भी काफी होता है। सड़क हादसों में यहा हर साल औसतन 300 लोग अपनी जान गवा देते हैं। शासन-प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी सड़क हादसों पर रोक नहीं लग पा रही है।
पुलिस विभाग के आंकड़ों पर ही गौर करें तो हर साल करीब 300 लोगों की सड़क हादसे में मौत हो जाती है और 500 से अधिक लोग हर साल या तो घायल होते हैं या अपंग हो जाते है। वर्ष 2019 में कुमाऊं की सड़कों पर कुल 567 हादसे हुए और 341 लोगों की मौत हो गई, जबकि 521 लोग घायल हुए।
गुजरे 4 सालों में मौतों के आंकड़ों में मामूली कमी आई, लेकिन हादसों की रफ्तार पर लगाम नहीं लगी। वर्ष 2020 में जहां 345 मौंते हुईं, वहीं वर्ष 2021 में 271 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कुल मिलाकर गुजरे 4 सालों में कुल 1938 सड़क हादसे हुए और 1174 मौतें हुई। जबकि 1910 लोग घायल हुए। आपको बता दें कि ये वह हादसे हैं, जो पुलिस रजिस्टर में दर्ज हैं। तमाम ऐसे हादसे, जिनमें कभी शिकायत तक दर्ज हुई या कराई ही नहीं गई।
ये हैं पिछले 4 साल में हुए हादसों की तस्वीर
वर्ष हादसा मौत घायल
2019 567 341 521
2020 348 345 516
2021 472 271 357
2022 596 217 516
कुल 1983 1174 1910
हमेशा से खतरनाक रही है रामपुर रोड
हादसों के मामले में हल्द्वानी की रामपुर रोड हमेशा से खतरनाक रही है। इस सीधी और तकरीबन गड्ढा मुक्त सड़क पर रफ्तार अक्सर हादसों की वजह बनती है। इसके अलावा सड़क के किनारों पर मौजूद खामियां भी दुर्घटनाओं को दावत देती हैं। दरअसल, रामपुर रोड अधिकांश स्थानों पर जमीन से काफी ऊंची है। कई जगहों पर तो यह ऊंचाई एक से डेढ़ फीट की है और यही ऊंचाई हादसों का कारण बनती हैं। सबसे ज्यादा हादसे पहले एस मोड़ पर होते थे, लेकिन यहां चौड़ीकरण के बाद अब हादसों की संख्या में कमी आई है।
पुलिस ले रही प्राथमिक उपचार का ज्ञान
हादसों के बाद मौतों की संख्या कम करना पुलिस की पहली प्राथमिकता है। आईजी कुमाऊं डॉ.नीलेश आनंद भरणे के मुताबिक, प्रदेश स्तर पर हादसों को रोकने की कवायद शुरू हो चुकी है। हमें भी यही निर्देश मिले हैं। निर्देशों के तहत अब चिह्नित पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग में बताया जाएगा कि हादसों के बाद घायलों को कैसे रेस्क्यू करना है और मौके पर चिकित्सक की अनुपस्थिति में घायलों को किस तरह प्राथमिक उपचार देना है, ताकि घायल को सुरक्षित अस्पताल पहुंचा कर उसका जीवन बचाया जा सके।
नहीं काम आ रहा सड़क सुरक्षा सप्ताह
पुलिस विभाग हर साल पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन करता है और ऐसे 33 सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन अब तक किया जा चुका है, लेकिन इसके नतीजे धरातल पर देखने को नहीं मिल रहे। यह आयोजन लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से किया जाता है। अब पता यह नहीं कि लोग जागरुक होना नहीं चाहते या फिर जागरुकता कार्यक्रम में ही कुछ कमी रह जाती है। कुल मिलाकर इस तरह के आयोजन का असर न तो देखने को मिल रहा है और न ही लोगों पर हो रहा है।
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