प्रयागराज : भाजपा सांसद कमलेश पासवान को हाईकोर्ट से मिली राहत
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 में हुए दंगे के एक मामले में भाजपा सांसद कमलेश पासवान को जमानत देते हुए निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई डेढ़ साल की सजा पर रोक लगा दी है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की एकल पीठ ने सांसद पासवान की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। मालूम हो कि अपर सिविल जज/अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,गोरखपुर ने पासवान और 6 अन्य को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। वर्ष 2008 में कमलेश पासवान समाजवादी पार्टी के सदस्य थे और उन्होंने सपा नेता अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने चक्का जाम कर दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला जलाया था।
इसी कारण गोरखपुर की निचली अदालत ने बांसगांव से बीजेपी सांसद कमलेश पासवान और उनके समर्थकों को डेढ़ साल की सजा सुनाई थी। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट ने उनकी अपील को निरस्त करते हुए सांसद और उनके समर्थकों को 15 दिन के भीतर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया था। इसके बाद सांसद और उनके समर्थकों ने इस आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट की शरण ली थी। निचली अदालत के आदेशों को चुनौती देते हुए और अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए सांसद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष एक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। याची का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनका अपराध निजी प्रकृति का है और उसके लिए उन्हें अधिकतम सजा दे दी गई है।
उन्होंने समाज के खिलाफ कोई अपराध नहीं किया है, साथ ही उनका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। इसके अलावा जिस आधार पर दोष सिद्धि और सजा दी गई है, वह साक्ष्य न तो ठोस है और ना ही टिकाऊ है, इसलिए वर्तमान आपराधिक पुनरीक्षण के लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत दे दी जाए। अंत में कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और आरोपी की संलिप्तता के आधार पर कहा कि पासवान एक सांसद हैं और निचली अदालत का फैसला उनके राजनीतिक करियर पर कलंक लगा देगा। जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अतः उनकी सजा पर रोक लगाते हुए निचली अदालत की ओर से लगाए गए जुर्माने को 1 महीने के भीतर जमा करने का निर्देश देते हुए उन्हें और उनके समर्थकों को जमानत दे दी गई।
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