संवाद की नई परंपरा
लोकतंत्र में जनता से संवाद सबसे अहम कड़ी है। यह संवाद जितना मजबूत होता है, लोकतंत्र भी उतना ही मजबूत होता है। लोकतंत्र की सफलता के इसी मूलमंत्र पर अमल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को माध्यम बनाया।
कार्यक्रम के 100 संस्करण रविवार को पूरे हुए। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के जरिए जनता से सीधा संवाद कर ऐसे कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, जिन्होंने देश में विकास के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाया है। मन की बात कार्यक्रम का पहला प्रसारण 3 अक्तूबर 2014 को किया गया।
जनवरी 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी उनके साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शासन के दिन-प्रतिदिन के मुद्दों पर नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करना रहा है। कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता से सीधा संवाद स्थापित कर एक नया आयाम स्थापित किया है।
उन्होंने मन की बात कार्यक्रम से देश के उन्नयन और नवनिर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाया।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात हो, स्वच्छ भारत आंदोलन हो, खादी के प्रति प्रेम हो, वोकल फॉर लोकल के प्रति जागरूकता हो या फिर प्रकृति और उन्नति की बात हो, मन की बात कार्यक्रम जिस विषय से भी जुड़ा वो जन आंदोलन बन गया।
राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाने के लिए प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम का बेहतर इस्तेमाल किया। उधर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आश्चर्य है कि एक राजनीतिक नेता ने 100 एपिसोड में लोगों से बातचीत की, लेकिन एक भी राजनीतिक मुद्दा नहीं उठाया। मन की बात कार्यक्रम की प्रमुख बात यह भी रही कि इसके जरिए ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया जो देश और दुनिया के सामने कभी नहीं आए।
पीएम ने कहा कि हमने एक और मुहिम शुरू की थी कि ग़रीब छोटे दुकानदारों से मोलभाव नहीं करेंगे, झगड़ा नहीं करेंगे। जब ‘हर घर तिरंगा’मुहिम शुरू हुई, तब भी ‘मन की बात’ ने देशवासियों को इस संकल्प से जोड़ने में खूब भूमिका निभाई। ऐसे हर उदाहरण, समाज में बदलाव का कारण बने हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न विषयों पर अपनी सोच और भावनाएं देश से साझा करते रहे हैं।‘मन की बात’ से देश का विमर्श सकारात्मक धरातल पर आया, जो इससे पहले विवादित मुद्दों पर केंद्रित रहा है। प्रधानमंत्री ने कई ऐसे विषयों पर चर्चा की जिसके बारे में देश में फिलहाल कम ही जागरूकता है। कार्यक्रम लोगों में जागरुकता बढ़ाने और दूसरों के गुणों से सीखने का बड़ा माध्यम बन गया।
