सीमापार आतंकवाद

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में शुक्रवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में पांच जवान शहीद हो गए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भारत के दौरे पर हैं। ऐसे में राजौरी की यह घटना होना बड़ी बात है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा कि सीमापार आतंकवाद समेत इसके सभी स्वरूपों का खात्मा किया जाना चाहिए।

आतंकवाद से कड़ाई के साथ निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी, चीन के विदेश मंत्री छिन कांग और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मौजूदगी में जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद की अनदेखी करना समूह के सुरक्षा हितों के लिए नुकसानदेह होगा।

आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तपोषण के सभी तरीकों को बंद किया जाना चाहिए। वास्तव में आतंकवाद क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है और आतंकवाद से मुकाबला करना एससीओ के मूलभूत कार्यक्षेत्र में शामिल है। एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक दोनों देशों के लिए बहुपक्षीय मंच पर साथ जुड़ने का बेहतर अवसर था। राजौरी में आतंकियों के साथ मुठभेड़ की छाया बिलावल की भारत यात्रा पर पड़ी है।

सम्मेलन में भारतीय और पाकिस्तानी दोनों पक्ष एक-दूसरे से दूरी बनाए दिखाई दिए। जबकि 2011 में हिना रब्बानी खार के बाद किसी भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा है। बिलावल की भारत यात्रा इस्लामाबाद द्वारा जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद के उपयोग सहित कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संबंधों में जारी तनाव के बीच हो रही है। 

भारत ने बार-बार पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया है और कार्रवाई की मांग की है। भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा और चेतावनी दी है कि  भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के सभी प्रयासों से निपटने के लिए दृढ़ और निर्णायक कदम उठाएगा। भारत यह कहता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा रखता है। लेकिन इसके लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है।

कई आतंकवादी समूह पाकिस्तान की जमीन से काम करते हैं और विशेष रूप से घाटी में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाते हैं। आज भी आतंकवाद का खतरा बेरोकटोक जारी है और इससे नजरें हटाना हमारे सुरक्षा हितों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।