कड़ी चेतावनी
भारत और चीन के बीच 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से बनी तनाव की स्थिति के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने साफ तौर पर चीन को चेता दिया है कि लद्दाख में चीनी अतिक्रमण पर अगर बातचीत से सहमति नहीं बनती है तो सैन्य विकल्पों …
भारत और चीन के बीच 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से बनी तनाव की स्थिति के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने साफ तौर पर चीन को चेता दिया है कि लद्दाख में चीनी अतिक्रमण पर अगर बातचीत से सहमति नहीं बनती है तो सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए पहचाने जाने वाले चीन को यह चेतावनी उचित ही है। गलवान घाटी में पहले अतिक्रमण, फिर भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला करने के बाद बातचीत पर भी चीन कायम नहीं रहा है। उसकी नीयत में खोट है, इसीलिए वह लगातार बातचीत को भटका भी रहा है।
इस बीच चीन ने अपने बयान में लद्दाख के फिंगर क्षेत्र से पीछे हटने का जो फार्मूला दिया है उसे भारत ने सीधे तौर पर नकार दिया है। ऐसा कर देश ने चीन को साफ संदेश दिया है कि वह अब उसके किसी भी प्रकार के आक्रमण को न केवल विफल करने में सक्षम है बल्कि अतिक्रमण न हटने की स्थिति में उस पर आक्रमण भी किया जा सकता है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बयान का यही सीधा अर्थ है जिसे चीन को समझ जाना चाहिए। भारत की हमेशा से नीति शांति की रही है। विदेशी सीमाओं पर देश ने न कभी अतिक्रमण किया न ही हमारी विस्तारवादी नीति है। मगर इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढील दें।
चीन को यह बात अच्छी तरह समझ जानी चाहिए कि हमारी सेना अपनी एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने में समक्ष तो है ही, जरूरत पड़ने पर वह दुश्मन को करारा सबक भी सिखा सकती है। चीन इस बीच नेपाल, पाकिस्तान के सहारे भी देश पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। दोनों ही देशों की आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाते हुए वह उन्हें धन तो मुहैया कराता ही है, इसके बदले वह उनकी जमीनों पर कब्जा कर भारत के खिलाफ अपनी सैन्य मजबूती बढ़ा रहा है।
मगर उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सैन्य शक्ति अब किसी भी आक्रमण का मुकाबला करने के लिए न केवल तैयार है बल्कि किसी भी पल दुश्मन के किले में सेंध लगाने में भी सक्षम है। इसी बात को समझते हुए जनरल बिपिन रावत ने चीन को चेता दिया है जो सही वक्त पर दी गई सही चेतावनी है। इस बात से चीन को समझना पड़ेगा कि भारत की सेना अब बचाव के लिए ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर हथियार भी उठा सकती है।
