नैनीताल: जिलिंग एस्टेट में निर्माण पर 12 को सुनवाई, 44 विला, हेलीपैड और रिसॉर्ट कॉटेज सहित अन्य का निर्माण का मामला

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Edited By Amrit Vichar
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नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भीमताल के जिलिंग एस्टेट में हो रहे निर्माण कार्यो के खिलाफ दायर जनहित  याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। दो दिन सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने अगली सुनवाई हेतु 12 मई की तिथि नियत की है।   

 मामले के अनुसार, वीरेंद्र सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि 1980 के दशक में जिलिंग एस्टेट को संपत्ति बेच दी थी, साथ में उनके बीच यह भी सहमति हुई थी कि अगर वन क्षेत्र में कोई अनाधिकृत गतिविधि की जाती है तो वह शिकायत कर सकता है। परन्तु इस करार के विरुद्ध जाकर वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की गईं।

इसको लेकर याचिकाकर्ता ने पहले एनजीटी और फिर सुप्रीम कोर्ट में इसकी अपील की। शिकायत में कहा गया था कि जिलिंग एस्टेट के द्वारा करीब 44 विला, हेलीपैड और रिसॉर्ट कॉटेज सहित अन्य का निर्माण जिलिंग एस्टेट में किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया कि जिलिंग एस्टेट ने सक्षम अधिकारियों से कोई अनुमति प्राप्त किए बिना विकास गतिविधियों को करने के लिए एक जेसीबी मशीन का भी इस्तेमाल किया। एस्टेट ने कभी भी पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं ली।

इस पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि एस्टेट ने घने वन क्षेत्र में विकास गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिसमें 40 फीसदी से अधिक घने पेड़ हैं, हम पूरे जिलिंग के नए सिरे से जांच कराना चाहते है। 11 फरवरी 2020 को उच्चतम न्यायालय ने राजस्व और वन विभाग को इसका सर्वे व जांच करने के आदेश दिए थे, उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिसकी वजह से उन्हें उच्च न्यायलय में इसकी जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।

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