भ्रष्टाचार का तंत्र

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

यह बात कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि भ्रष्टाचार देश के लिए बड़ी समस्या है। इंदिरा गांधी इसे वैश्विक समस्या बताती थीं। भ्रष्टाचार के मामले सामने आने पर जवाहर लाल नेहरू ने क्रोध में कहा था कि भ्रष्टाचारियों को फांसी पर लटका देना चाहिए। इस सबके बावजूद भ्रष्टाचार पर कभी लगाम नहीं लगी, बल्कि यह कहना अधिक बेहतर होगा कि लगाम लगाने की कोशिश नहीं की गई। यदि की गई तो बेमन से आधी अधूरी कोशिश की गई।

इसका नतीजा यह हुआ कि भ्रष्टाचार एक तरह से स्वीकृत परंपरा हो गई। उसकी जड़ें इतनी गहरी और दूर तक फैलीं कि कोई भी संवैधानिक या निजी संस्था बच नहीं सकी। 2014 के बाद मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति अपनाई और छापे डालने शुरू किए तो जो सच सामने आया वह दंग कर देने वाला था। राजनेताओं, व्यापारियों और तमाम बिचौलियों के घरों से अकूत संपत्ति बरामद होने लगी।

कमरे भर-भर नोट निकलने लगे। ताजा मामला मध्य प्रदेश के भोपाल शहर का है जहां पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन विभाग में सहायक इंजीनियर के पद पर कार्यरत संविदाकर्मी महिला भ्रष्टाचार में लिप्त पाई गई है। गुरुवार को लोकायुक्त ने संविदा कर्मी के घर व फार्महाउस पर दबिश दी जिसमें सात करोड़ से अधिक की संपत्ति और महंगे व लग्जरी सामान के साथ कीमती आभूषण बरामद हुए हैं।

तीस हजार रुपये वेतन पाने वाली संविदा कर्मी सहायक इंजीनियर का वेतन जांच में आय से 232 गुना अधिक पाया गया। यह कृत्य स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जो यह दर्शाता है कि अधिकारी कैसे सरकार की आंखों में धूल झोंककर मनमाने तरीके से कार्य ही नहीं करते हैं, बल्कि सरकार के विकास कार्यों को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

यह मामला पहला है न अंतिम है, बल्कि यह एक कड़ी भर है जो बताती है की जंजीर कितनी बड़ी है। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार का कोई न रास्ता निकाल ही लेते हैं। यदि वे इसमें पकड़े भी जाते हैं तो लचर कानून की वजह से आरोपों से बरी हो जाते हैं। अधिकारियों को समझना होगा कि वे जनता के मालिक नहीं, बल्कि सरकार के प्रतिनिधि हैं जो कि जनता को सुविधा मुहैया कराने के लिए नियुक्त किए गए हैं।

ऐसा भी नहीं है कि विभाग के सभी अधिकारी ही भ्रष्ट हों, लेकिन कुछ लोग ही पूरे तंत्र को बदनाम करने का कार्य कर रहें हैं। सरकार को चाहिए कि संघन अभियान चलाकर ऐसे लोगों को चिन्हित करे और पकड़े जाने पर यथासंभव कार्रवाई की जाए।