आतंकवाद को बढ़ावा
पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहां के हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। महंगाई चरम पर है। महंगाई और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने देश की जीडीपी के ग्रोथ के अनुमान को कम कर दिया है।
आईएमएफ ने पाकिस्तान की जीडीपी के अनुमान को 2 फीसदी से घटाकर 0.5 फीसदी कर दिया। महंगाई के साथ-साथ पाकिस्तान के युवाओं को बेरोजगारी की मार भी झेलनी पड़ रही है। आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से त्रस्त पाकिस्तान इसके बावजूद आतंकवादी गुटों को बढ़ावा देने से बाज नहीं आ रहा है।
कई आतंकवादी समूह पाकिस्तान की जमीन से काम करते हैं और विशेष रूप से कश्मीर घाटी में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाते हैं। पाकिस्तानियों ने भारतीय सीमाओं में घुसने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं। उन्होंने कुछ इलाकों में सुरंग बनाई हैं और कुछ में ड्रोन से भारत में ड्रग्स, विस्फोटक हथियार और गोला-बारूद भेज रहे हैं। रविवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया गया, लेकिन इस दौरान एक जेसीओ घायल हो गया।
रक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादियों और सैनिकों के बीच हुई गोलीबारी के बाद पाकिस्तानियों ने घटना स्थल के ऊपर एक क्वाडकॉप्टर उड़ाने की कोशिश की। क्वाडकॉप्टर का मुद्दा निश्चित रूप से घुसपैठ की गतिविधियों के दौरान उचित सहायता प्रदान करने में आतंकवादियों और पाकिस्तानी सेना के बीच मिलीभगत को सामने लाता है। 5 मई को राजौरी के कांडी वन क्षेत्र में आतंकी हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए।
इससे पहले 20 अप्रैल को उसी क्षेत्र के पास एक आतंकवादी हमले में पांच सैनिक शहीद हुए। दो सप्ताह के अंतराल में इस क्षेत्र में दो हमलों में 10 जवानों का शहीद हो जाना चिंताजनक है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र हाई अलर्ट पर है क्योंकि श्रीनगर इस महीने के अंत में होने वाली जी 20 बैठक की मेजबानी कर रहा है।
पहले पुंछ और राजौरी का इलाका अपेक्षाकृत शांत था। फिर धारा 370 के खत्म होने के बाद आतंकवादी गतिविधियां बढ़ गईं। इस क्षेत्र में एलओसी पर बड़ी मात्रा में तारों की घेराबंदी की गई है और इसमें भूकंपीय से लेकर थर्मल, इमेज इंटेंसिफायर से लेकर मूवमेंट को ट्रैक करने वाले सभी तरह के सेंसर लगे हैं।
संचार की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी भी की जाती है। सीमा पर सुरक्षाबलों की सघन तैनाती और तमाम तरह के सेंसर के बावजूद छोटे जिहादी गुटों को घुसपैठ में सफलता मिल रही है। ऐसे में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान से कड़ाई के साथ निपटने के लिए ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
