पीलीभीत: अभिरक्षा में की थी अभियुक्तों की पिटाई, बरखेड़ा थाने के एसओ पर परिवाद दर्ज... जानिए पूरा मामला
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव तिवारी ने किए आदेश
पीलीभीत, अमृत विचार। अभिरक्षा में पुलिस द्वारा अभियुक्तों से मारपीट के आरोप में घिरे एसओ ब्रजवीर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अभियुक्तों की शिकायत पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव तिवारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ अभियुक्तों का पुन: मेडिकल परीक्षण कराया। वहीं पुलिस द्वारा किए गए इस कृत्य को अवैध शारीरिक हिंसा करने की कोटि में मानते हुए एसओ बरखेड़ा ब्रजवीर सिंह के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
बता दें कि थाना बरखेड़ा में बीते दिनों एक रिपोर्ट रंगदारी, तोड़फोड़ आदि धाराओं में दर्ज की गई थी। वादी बिलसंडा क्षेत्र के गौहनिया गांव निवासी बलकार सिंह की ओर से लिखी गई इस रिपोर्ट में बरखेड़ा निवासी हरिओम, राहुल, मोनू, अवधेश, प्रेमशंकर और एक अज्ञात को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि उक्त सभी बाइक पर सवार होकर पीछा करते हुए आए और फिर उसके ट्रक को रोक लिया। यह कहा कि वह हादसे में दो लोगों की जान लेकर भागा है। इसी का झांसा देकर रुपये की मांग की गई थी।
बरखेड़ा पुलिस ने मामले में धारा 386,34, 341, 504, 506, 427 आईपीसी के तहत चार अभियुक्तों राहुल, सोनू, प्रेमशंकर, अवधेश का चालान कर न्यायालय में पेश किया था। तब अभियुक्तों की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि उन्हें झूठा फंसाया है। चारों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है। न्यायालय ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अभियुक्तों का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने के आदेश दिए।
उधर, ताजा चोटों के निशान के संबंध में एसओ बरखेड़ा को नोटिस जारी किया था कि अभियुक्तों के शरीर पर अभिरक्षा में रहते चोटें कैसे और क्यों आई? नोटिस के जवाब में एसओ बरखेड़ा ने बताया कि जब न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अभियुक्तगण को पुन: चिकित्सीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, तो वहां पर पहले से ही 30-40 व्यक्ति, जिसमें से कुछ पत्रकार भी मौजूद थे।
उन्होंने पुलिस के साथ अभद्रता की। उपरोक्त अभियुक्तों के साथ भी धक्का मुक्की की। जिसके परिणाम स्वरूप अभियुक्तों के चोटें आई न कि पुलिस की मारपीट से चोटें आई। एसओ के स्पष्टीकरण से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ। न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की है कि उपरोक्त स्पष्टीकरण को सही मान भी लिया जाए तो थानाध्यक्ष द्वारा इस तथ्य के संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है कि पुलिस अभिरक्षा के समय अभियुक्तगण के साथ धक्का मुक्की व मारपीट करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कोई अभियोग पंजीकृत किया अथवा नहीं?
पुलिस तो तथाकथित 30-40 व्यक्तियों के विरुद्ध विधि संगत कार्यवाही की जानी चाहिए थी। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था। थानाध्यक्ष बरखेड़ा द्वारा न्यायालय में दिया स्पष्टीकरण संतोषजनक, विश्वसनीय एवं व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता है। पुलिस पर मारपीट किए जाने का आरोप प्रथम दृष्टया विश्वसनीय प्रतीत होता है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव तिवारी ने अपने आदेश में लिखा है कि थानाध्यक्ष बरखेड़ा का उपरोक्त कृत्य स्वयं की अभिरक्षा में अभियुक्तगण के प्रति अवैध शारीरिक हिंसा की कोटि में आता है। जिसके लिए उनके विरुद्ध पुलिस अधिनियम की धारा - 29 के तहत कार्यवाही अग्रसाारित की जाती है। एसओ बरखेड़ा ब्रजवीर सिंह के विरुद्ध उक्त धारा के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश किया। साथ ही अगली सुनवाई के लिए 25 मई तिथि नियत की है।
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