विश्व हाइपरटेंशन दिवस: पढ़े-लिखे युवा नहीं सुन पा रहे हैं हाइपरटेंशन की आहट

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप के संबंध में दो तथ्य महत्वपूर्ण होने के साथ चिंताजनक भी हैं। एक तो हाइपरटेंशन के शिकार युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में अब कोई ज्यादा फर्क नहीं रह गया है, दूसरे युवाओं में भी उच्चशिक्षित युवा साइलेंट किलर (खामोश हत्यारा) कही जाने वाली इस घातक बीमारी की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। यही वजह है कि किडनी, हार्ट, फेफड़ों की बीमारियों के साथ ब्रेन स्ट्रोक से जान गंवाने वाले युवाओं की संख्या भी कम नहीं है।

लंबे समय से लगातार बेचैनी हाइपरटेंशन का सबसे स्पष्ट और प्रमुख लक्षण है। डॉक्टर इसे इस दौर की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक मानते हैं, क्योंकि यह समय के साथ गंभीर हृदय रोग के साथ कई दूसरी बीमारियों का भी कारण बन जाती है। चिंता, तनाव और अनियमित जीवन शैली के जाल में उलझे युवा काफी तेजी से हाइपरटेंशन का शिकार हो रहे हैं। इससे भी ज्यादा गंभीर यह है कि युवाओं में इसके बावजूद हाइपरटेंशन को लेकर बेपरवाही है जो उन्हें तेजी से गंभीर बीमारियों की ओर ले जा रही है।

पीजीआई की कम्युनिटी मेडिसिन संस्था की ओर से युवाओं पर किए एक शोध में पता चला है कि हाई प्रोफाइल और उच्च शिक्षित युवा मध्य वर्ग के युवाओं की तुलना में हाइपरटेंशन को लेकर ज्यादा लापरवाह हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को हाइपरटेंशन से सचेत रहना चाहिए वर्ना स्थिति खतरनाक हो सकती है।
अनिद्रा और एंग्जाइटी भी ले जाती है हाइपरटेंशन की ओर

जिला अस्पताल के मन कक्ष के प्रभारी डॉ. आशीष के मुताबिक अनिद्रा और एंग्जाइटी के मरीजों की भी संख्या बढ़ रही है। ऐसे अधिकांश मरीजों में हाइपरटेंशन के भी लक्षण होते हैं, इन मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनुपम शर्मा बताते हैं कि हाइपरटेंशन आनुवांशिक कारणों से भी होता है। पहले इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। समय पर इलाज न कराने पर आंख, फेफड़े, गुर्दे जैसे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों इसका गंभीर असर पड़ता है।

एनसीडी चल रहा है मगर कहां, किसी को पता नहीं
गैर संचारी रोगों के इलाज के लिए शासन ने एनसीडी क्लिनिक स्थापित करने का आदेश दिया था। अफसरों के मुताबिक यह क्लिनिक पहले जिला अस्पताल में चल रहा था, फिर कुतुबखाना फ्लाईओवर का निर्माण शुरू होने के बाद इसे मरीजों की सहूलियत के लिए तीन सौ बेड अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि तीन सौ बेड अस्पताल में इसका संचालन कहां हो रहा है और यहां कोई मरीज आ भी रहा है या नहीं, इसका पता किसी को नहीं है।

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