Odisha Train Accident : कवच सिस्टम के कारगर होने पर बहस, गति नियंत्रण दुर्घटना का बृहद प्रभाव कम कर सकता है
कवच सिस्टम के कारगर होने पर बहस।
कवच सिस्टम के कारगर होने पर बहस। गति नियंत्रण दुर्घटना का बृहद प्रभाव कम कर सकता है। हर किलोमीटर पर कवच लगाया जाता है।
कानपुर, [महेश शर्मा]। ट्रेनों की आपसी भिड़ंत को रोकने यानी ज़ीरो एक्सीडेंट के लिए आरडीएसओ द्वारा तैयार तकनीक का नाम है कवच। कवच सिस्टम के उपयोग पर बहस जारी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कवच सिस्टम लगाया गया होता तो इतना बड़ा ट्रेन एक्सीडेंट न होता। सरकार ने इसका इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से नहीं किया। हालांकि एक वर्ग ओडिशा ट्रेन दुर्घटना नियंत्रण में कवच की भूमिका नकारता है।
देश में 1.15 लाख किलोमीटर पटरियों का नेटवर्क है। एक गणना के मुताबिक इस तकनीक पर 34 हजार करोड़ खर्चा आता। रेल बजट में आर्थिक प्रावधान को देखते हुए यह खर्च बहुत बड़ा नहीं है।
2012 में ईजाद इस तकनीक पर 2022 में सरकार ज्यादा गम्भीर दिखी। 2018 में भी कवच चर्चा में आया। बीते 10 सालों में 8 बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं हैं जिनमें 2016 में कानपुर के पुखरायां में कैफियत के बेपटरी होने की दुर्घटना भी शामिल है जिसमे करीब 150 जानें चली गयी थी। कवच भारतीय रेलवे का स्वचालित सुरक्षा प्रणाली सिस्टम है, जिसके जरिए रेलवे ट्रेन हादसों को रोकने का प्लान बना रही है।
दरअसल, कवच लोकोमोटिव में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन की एक ऐसी प्रणाली है जो रेलवे के सिग्नल सिस्टम के साथ साथ पटरियों पर दौड़ रही ट्रेनों की स्पीड को भी नियंत्रित करती है। रेल मंत्रालय द्वारा इसका डेमो किया जाता रहा।
23 दिसंबर 2022 को राज्यसभा में एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि आने वाले समय में कवच सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से इंस्टॉल किया जाएगा। कवच सिस्टम को अब तक साउथ सेंट्रल रेलवे के 1445 किलोमीटर रूट के साथ साथ 77 ट्रेनों में जोड़ा गया है। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर भी इसे इंस्टॉल करने का काम तेजी से चल रहा है।
