बरेली: फाइल फांक रही धूल, घोटालेबाज कर रहे मौज
बरेली, अमृत विचार। एक तरफ राज्य सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, वहीं ग्राम पंचायतों में विकास कराने को भेजी शासकीय धनराशि का गबन करने वाले प्रधान और सचिव पर अफसर मेहरबान हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के छह महीने बाद भी घोटाले की फाइल डीपीआरओ कार्यालय में धूल फांक रही …
बरेली, अमृत विचार। एक तरफ राज्य सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, वहीं ग्राम पंचायतों में विकास कराने को भेजी शासकीय धनराशि का गबन करने वाले प्रधान और सचिव पर अफसर मेहरबान हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के छह महीने बाद भी घोटाले की फाइल डीपीआरओ कार्यालय में धूल फांक रही है। इससे जहां अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, इन दिनों मामला विकास भवन में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बिथरीचैनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत त्रिकुनिया के अरविंद पटेल, प्रदीप कुमार, मोहनलाल, तिलक आदि ग्रामीणों ने जनवरी 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार को दिए गए शपथपत्र में 2016 से 2018 के बीच मनरेगा, ग्राम निधि आदि से हुए विकास कार्यों में लाखों का घोटाले करने का आरोप प्रधान मीरा देवी और सचिव पर लगाया था।
जांच ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता देवेंद्र बालियान को सौंपी गई। 10 बिंदुओं पर की गई शिकायत की मौके पर जांच की गई तो गांव के प्रेमपाल के घर से टीकाराम के घर तक सीसी रोड डलवाने, गांव के मेन रोड खडंजे के पास मिट्टी भराव, सोलर लाइटें लगावाने, शौचालय निर्माण आदि कार्यों में तमाम अनियमितताएं मिलीं।
इसके अलावा मनरेगा व ग्राम निधि से हुए कई निर्माण कार्य ऐसे भी मिले जिनके बिल वाउचरों पर केवल प्रधान के हस्ताक्षर थे। जबकि प्रधान और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए थे। सांठगांठ से हुए इस खेल में घोटाला उजागर होने पर जांच अधिकारी ने प्रधान को दोषी मानते हुए सचिव को भी इसमें संलिप्त माना।
अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट फरवरी 2020 में डीपीआरओ को भेज दी गई। इसके बाद मामला फाइलों में दफन कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद अफसर कार्रवाई से बच रहे हैं। इधर, मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने डीपीआरओ से प्रकरण की जानकारी लेकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
