अशांत मणिपुर

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Edited By Amrit Vichar
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मणिपुर में एक माह से अधिक समय से अशांति और हिंसक तनाव का माहौल बना हुआ है। मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद 50 हजार से अधिक लोग वर्तमान में राज्य भर के 349 राहत शिविरों में रह रहे हैं। राज्य का मैतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहा है।

अब कुकी समुदाय ने दावा किया है कि मणिपुर में वर्तमान स्थिति केवल इसलिए पैदा की गई जिससे कुकी पहाड़ी हिस्सों से हट जाएं। कुकी समुदाय की मांग है कि अब उन्हें मैतेई समुदाय से अलग रहने दिया जाएगा, राज्य में मैतेई बहुमत में हैं। राज्य पुलिस के सहयोग से सेना और अर्धसैनिक बल राज्य में शांति बहाल करने के लिए तलाशी अभियान चला रहे हैं और केंद्र सरकार भी हालात पर नजर रख रही है। लेकिन हिंसा की घटनाओं पर काबू नहीं पाया जा सका है।

ताजा मामला खोखेन गांव का है जहां शुक्रवार को जवानों की वर्दी में आए मैतेई समुदाय के उग्रवादियों ने पहले कॉबिंग के बहाने ग्रामीणों को घरों के बाहर बुलाया और फिर उन पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई।

कुछ दिनों पहले असम राइफल्स के शिविर पर हथियारबंद लोगों ने हमला किया और वहां घायल एक बच्चे को जब उसकी मां के साथ एंबुलेंस में ले जाया जा रहा था, तो उग्र भीड़ ने एंबुलेंस को घेर कर उसमें आग लगा दी। उधर सरकार ने राज्य में इंटरनेट पर बैन 15 जून तक के लिए बढ़ा दिया है। राज्य में इंटरनेट बैन करने का फैसला पहली बार मई के पहले हफ्ते में लिया गया था। 

गौरतलब है कि इंटरनेट बंद होने से रोजमर्रा के कामकाज और कारोबार में अड़चनें आ रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी अभियान के दौरान लोगों के पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जा रहे हैं। जाहिर है हिंसा को जारी रखने के लिए कहीं न कहीं से हथियारों की आपूर्ति की जा रही है। हालात बता रहे हैं कि इस तरह की हिंसा को भड़काने की तैयारी काफी पहले से की जा रही होगी।

सीबीआई इस बात का पता लगाएगी कि कुकी और मैतई समुदाय के बीच हिंसा किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। सवाल ये है कि सरकार मणिपुर में स्थिति की गंभीरता का आकलन पहले क्यों नहीं कर पाई। म्यांमार की सीमा से लगे मणिपुर में उग्रवाद की समस्या पहले से है, फिर क्यों खुफिया एजेंसियों ने इस बात की सतर्कता नहीं बरती कि स्थानीय लोगों तक हथियार न पहुंचें। इस समय मणिपुर में शांति बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथिकता होनी चाहिए। 

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