अयोध्या: देवदूत हैं सरयू के नाविक, लगा देते हैं जान की बाजी, जीविका चलाने के साथ ही जान बचाने की भी निभा रहे जिम्मेदारी
अयोध्या/अमृत विचार। अयोध्या में कुछ नाविकों को लोग देवदूत मानते हैं, जो सरयू में डूबते हुए लोगों को बचाने के लिए जाने जाते हैं। युवा नाविक गृहस्थी चलाने के साथ ही जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं। नदी में कहीं भी मदद की गुहार सुनते ही आधा दर्जन युवा एक होकर नदी में छलांग लगा देते हैं।
लगभग एक दशक में इन युवाओं ने कितनों की जान बचाई ये आंकड़ा इनके पास भी नहीं है, लेकिन कहते हैं अभी एक सप्ताह में ही एक दर्जन से अधिक लोगों की जान बचाई है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब तक सैकड़ों में संख्या में लोगों को बचाया जा सका है।
जून माह में सरयू के जलस्तर में उतार चढ़ाव शुरू हो जाता है। यही कारण है इस माह में प्रति वर्ष डूबने वालों की संख्या एकाएक बढ़ जाती है। क्योंकि सरयू में स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को यह नहीं पता होता है कि आगे कितना गहरा है। इसी गफलत में श्रद्धालु आगे बढ़ते हैं और डूब जाते हैं। इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा होती है। इसी माह में डूबने से मरने वाले लोगों की संख्या आठ है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
सरयू में नाव चलाने वाले कुछ युवाओं ने गोताखोर ग्रुप बना रखा है। इसमें सभी की उम्र 22 साल से लेकर 38 साल के बीच में है, जिसमें सतीश, कपिल देव, वीरचंद, कमलेश, गुलाबचंद, राजेंद्र, रुपेश, सोनू, विक्रम और जुगनू मांझी हैं। ग्रुप के किसी भी एक व्यक्ति को किसी के डूबने की सूचना मिली उसे तत्काल मिनटों में पहुंचा कर जान बचाने की कोशिश शुरू कर देते हैं।
इन लोगों का कहना है की 10 वर्ष पहले यह सभी लोग हाथ से नाव चलाने का काम करते थे, लेकिन अब मोटर वाली नाव चलाते हैं। इन लोगों का कहना है लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें विभिन्न जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। इनका कहना है कि जान बचाने के बाद जो खुशी मिलती है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
कुछ प्रमुख तिथियों पर गोताखोरों को किया जाता है सम्मानित
क्षेत्राधिकारी अयोध्या एसपी गौतम के मुताबिक समय-समय पर स्थानीय गोताखोर पुलिस प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोगों की जान बचाने का कार्य करते हैं। इसलिए इनके उत्साहवर्धन के लिए इन्हें 26 जनवरी 15 अगस्त आदि अति महत्वपूर्ण तारीखों को सम्मानित किया जाता है।
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