अमेठी: जानलेवा हमले के आरोपी की पुलिस पकड़ से दूर, पीड़ित अस्पताल में लड़ रहा जिंदगी की जंग
अमृत विचार/अमेठी। मोहनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पूरे शिव सिंह मजरे कूरा में एक सेवा निवृत्त हवलदार पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास भी नहीं कर रही है। थाना क्षेत्र के ग्राम पूरे शिव सिंह मजरे कूरा निवासी सेवा निवृत्त हवलदार मो. हफीज पुत्र स्व. मो. हयात 20 जून को गांव के बगल बने मुर्गी फार्म से वापस घर जा रहा था। रास्ते में 10 युवकों ने उस पर ताबड़तोड़ लाठी डंडे, हांकी, लोहे की पाइप से वार कर दिया।
जिसमें मो. हफीज गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों के सहयोग से सेवा निवृत्त हवलदार की जान बच सकी। वहीं सभी हमलावर फरार होने में सफल रहे। हफीज ने थाने में तहरीर देकर बताया कि उसको जान से मारने के लिए 10 युवकों ने लाठी-डंडा, लोहे की पाइप, हांकी व धारदार हथियार से हमला किया था।
मारपीट में वह गंभीर रूप से घायल हो गया है। जबकि लोग बताते हैं कि इससे पहले भी दबंगों ने हमला बोला था। इसी रंजिश को लेकर हफीज को जान से मारने की साजिश युवकों ने रच डाली थी। हमले में शामिल हमलावर मो.इजहार, मो. इरफान, मो. अफसान, मो. इस्तिखार, मो. तालिब, महमूद, मो. मासूक, मो.यूनुस निवासीगण पूरे शिव सिंह मजरे कूरा थाना मोहनगंज के रहने वाले है।
हमले में दो अज्ञात भी शामिल रहे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आठ नामजद व दो अज्ञात युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस ने नाटकीय अंदाज में मो. इजहार को गिरफ्तार कर जेल भेज अपनी पीठ थपथपा रही है। बांकी के नामजद हमलावर चार दिन बाद भी पुलिस की पकड़ से दूर है। वहीं हफीज अभी भी लखनऊ के कमांड अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
2017 में हफीज के पिता की कर दी गई थी हत्या
हफीज के पिता मो. हयात खां वर्ष 2017 में प्रधान प्रतिनिधि हुआ करते थे। उस समय उनकी बहन आबिदा ग्राम प्रधान थी। प्रतिनिधि होने के नाते विकास खंड अन्तर्गत आने वाले कार्यों में हयात खां का खासा दखल रहता था। उसी दौरान गांव के ही यूनुस द्वारा राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाब की भूमि पर गेहूं की बुआई करा दी गई थी। जिसका विरोध राजस्व व प्रधान द्वारा किया गया था। मुकदमा चला लेकिन निर्णय यूनुस के खिलाफ ही रहा।
19 अप्रैल 2017 को राजस्व ने तालाब की जमीन पर पककर तैयार हुई गेहूं की फसल नीलाम कर दी थी। अपनी हार को प्रतिष्ठा से जोड़कर उसी दिन मो. यूनुस, मो.इजहार, मो. मजहर, सिराज और रऊफ ने मिलकर मो.हयात की हत्या कर दी। हालांकि विवेचना के दौरान पुलिस ने केस से रऊफ का नाम हटा दिया था। पिता की हत्या में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए हफीज न्यायालय में पैरवी कर रहा है। इसी बात से खुन्नस खाकर जेल से छूटने के बाद दबंगों ने जानलेवा हमला कर हत्या करने की फिराक में लगे हैं।
मो. इजहार पर मुकदमों की है लंबी फेहरिस्त
मो. इजहार पर कोतवाली मोहनगंज में हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट, धमकाने सहित आधा दर्जन मुकदमें दर्ज है। 20 जून को हुए जानलेवा हमले का मुख्य आरोपी भी मो. इजहार ही है। सूत्रों से पता चला है कि मो. इजहार कोतवाली में अच्छी खासी पैठ बना रखा है। कई पुलिस वाले उसके मददगार भी बने हैं। हमले से पहले भी मो. इजहार पुलिस के नेटवर्क में था।
हमले के बाद पुलिस ने नाटकीय अंदाज में मो. इजहार की गिरफ्तारी दिखाकर अपनी पीठ थपथपा ली। जबकि गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में मो. इजहार पर दर्ज मुकदमों का ब्यौरा नहीं दिया गया था। जबकि ऐसा पहली बार मोहनगंज पुलिस ने आरोपी के बचाव में खाकी को शर्मसार किया है। छोटे से छोटे अपराध में गिरफ्तार आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस जारी प्रेस नोट में जिक्र किया करती थी।
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