Kanpur: अनसुलझी गुत्थी सुलझाने में माहिर यामिनी और नेक्सन, जहां कोई सुराग नहीं मिलता, वहां मददगार साबित होते डाग स्क्वायड

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कानपुर में अनसुलझी गुत्थी सुलझाने में माहिर यामिनी और नेक्सन।

कानपुर में अनसुलझी गुत्थी सुलझाने में माहिर यामिनी और नेक्सन। जहां कोई सुराग नहीं मिलता, वहां डाग स्क्वायड मददगार साबित होते है।

कानपुर, [अभिनव मिश्र]। मुंशीपुरवा निवासी कारीगर मो. अशरफ (45) पत्नी शबनम की मौत के बाद बेटी मुस्कान (20) व बेटे इरफान (18) के साथ जर्जर मकान में रहते थे। एक रोज खाना खाने के बाद अशरफ छत पर सोने चले गए थे। अगले दिन छत पर उनका लहुलूहान शव मिला। मौके पर पहुंची पुलिस को घटनास्थल के पास सीढ़ी लगी मिली। घटनास्थल पर पहुंचे डॉग स्क्वायड में शामिल ‘यामिनी’ व ‘नेक्सन’ ने दीवार के फिंगर प्रिंट को सूंघ कर पड़ोस के युवक फहीम पर लपक पड़े। पुलिस ने पूछताछ की तो उसने अपराध स्वीकार किया। 

डॉग स्क्वायड हर अपराध के खुलासे में पुलिस का हथियार बन गया है। किसी घटना में जब पुलिस को कोई सुराग नजर नहीं आता, तब इनकी भूमिका अहम हो जाती है। चोरी, लूट, हत्या जैसी कई घटनाओं का पुलिस ने डाग्स की मदद से ही घटनाओं का पर्दाफाश किया है। शहर के डॉग स्क्वायड में तीन श्रेणियां हैं। पहली श्रेणी का नाम ट्रैकर है, जिसमें तीन डाग्स हैं। यह हत्या, लूट, चोरी समेत अन्य वारदातों के बाद सुराग तलाशने में माहिर हैं।

इनके नाम यामिनी (जर्मन शेफर्ड, फीमेल), सीमा (डॉबरमैन, फीमेल), नेक्सन (डॉबरमैन, मेल) शामिल हैं।  दूसरी टीम नारकोटिक्स में यीप्पी (डॉबरमैन, फीमेल) शामिल है। वहीं बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वायड (बीडीडीएस) में दो डॉग शामिल हैं, जो कि श्याम नगर स्थित पीएसी की 37 बटालियन टीम में हैं। ये सभी डाग्स बेहद ही अनुशासित है। इन सभी के हैंडलर अलग-अलग है।

यामिनी सबसे वरिष्ठ व अनुभवी

डॉग स्क्वायड का नेतृत्व करने वाले हेड कांस्टेबल विजय ने बताया कि सीमा (9), नेक्सन (5), यप्पी (4) में सबसे वरिष्ठ यामिनी (11) है। उन्होंने बताया कि टीम में शामिल सभी डॉग्स प्रशिक्षित है, लेकिन क्राइम सीन में अधिकांश बार जाने के कारण यामिनी बेहद अनुभवी है।

बेहतर डाइट चार्ट के साथ मिलती कई सुविधाएं

प्रत्येक डॉग को रोजाना 600 ग्राम मीट, 600 मिली दूध, दो अंडे, 250 ग्राम सब्जी व 475 ग्राम आटा दिया जाता है। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में इनको इनवर्टर, पंखे व कूलर की सुविधा जाती है। वहीं सर्दी के मौसम में ब्लोअर, हीटर, कोट, कंबल व जैकेट की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। 

मानव गंध के कण ट्रैक करने में महारत हासिल

सभी डाग्स को पंचकूला (हरियाणा) में आईटीबीपी व टेकनपुर (ग्वालियर) में बीएसएफ द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षित डाग्स को क्राइम सीन पर मानव गंध के कण को सूंघ कर उनको ट्रैक करने में महारत हासिल है। इसके साथ ही घटना को अंजाम देने वाला यदि कोई हथियार व पानी का ग्लास तक छूकर जाता है तो ये डॉग्स उनको कुशलता पूर्वक ट्रैक कर सकते हैं। बर्शते क्राइम सीन पर किसी का आवागमन न हुआ हो। क्राइम सीन पर छेड़छाड़ से डॉग्स भ्रमित हो जाते हैं।

मिल चुके है कई पुरस्कार

डॉग यामिनी, सीमा, नेक्सन व यीप्पी को घटनाओं के खुलासे करने पर 26 जनवरी व 15 अगस्त को कई मेडल व प्रशस्ति पत्रों से नवाजा जा चुका है। श्याम नगर में संपत्ति विवाद में पिता की हत्या करने वाले बेटे की गिरफ्तारी व किदवई नगर में अपने छोटे भाई की पत्नी की हत्या का खुलासा करने में डाग स्क्वायड ने विशेष भूमिका निभाई थी।

जल्द मिलेंग तीन डॉग

आरआई सुरेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि जल्द ही डॉग स्क्वायड टीम में तीन और डॉग्स शामिल होंगें। 174 डॉग्स को लखनऊ से प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। प्रशिक्षण प्राप्त होने के बाद टीम को जल्द ही  तीन डाग्स उपलब्ध कराए जाएंगें।

          डॉग                   हैंडलर
1-     यामिनी           विजय
2-     सीमा            अरुणेश
3-    नेक्सन            कौशल
4-    यीप्पी            राजू

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